महिंद्रा बाहा एसएई 2016 इंदौर: बेमिसाल इंजीनियरिंग के ट्रैक पर दौड़ा आॅटोमोटिव इंडस्ट्री का भविष्य
इंदौर। रफ्तार, जुनून, टेक्निकल इंटेलिजेंस, अकेडमिक्स...वहां सबकुछ था। दूसरे शब्दों में कहें तो दूर-दूर तक फैले कई एकड़ के एरिया में खुले आसमान के नीचे जमीन पर देश की आॅटोमोटिव इंडस्ट्री को एक नए आयाम पर ले जाने की उम्मीदों को पर लगने की नुमाइश लगी थी।

देश के भविष्य की सुनहरी तकदीर लिखने वाले भावी इंजीनियर्स जुटे थे। आॅटोमेटिव इंडस्ट्री के दिग्गजों भी मौजूद थे। दरअसल, हम बात कर रहे हैं महिंद्रा 2016 बाहा एसएई के 9वें संस्करण के फाइनल रेसिंग इवेंट की। इंदौर के आउटस्कर्ट में स्थित पीथमपुर में आयोजित हुआ यह इवेंट 2007 से हर साल आयोजित किया जाता है।
रेस की शुरुआत महिंद्रा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और एसएई इंडिया के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका ने। इस अवसर पर एसएई यानी सोसायटी आॅफ आॅटोमेटिव इंजीनियर्स के आॅफिशियल्स भी मौजूद रहे।
इस बार महिंद्रा बाहा एसएई 2016 में कुल 395 इंजीनियरिंग टीमों ने हिस्सा लिया था। हालांकि, फिनाले तक आते-आते इनमें से महज 155 टीमें ही क्वॉलीफाई कर सकीं। इनमें से एंड्योरेंस टेस्ट के लिए 126 टीमों ने फाइनल रेसिंग इवेंट में हिस्सा लिया।
ये है बाहा इवेंट का इतिहास
यूं तो इस इवेंट की शुरुआत एसएई ने यूएस में की थी। महिंद्रा के प्रयासों के बाद इसे भारत में लाया गया ताकि भारत के भावी इंजीनियर्स की स्किल्स को अपने हुनर को प्रदर्शित करने का एक कॉमन प्लेटफॉर्म मिल सके। साथ ही उन्हें आॅटोमेटिव इंडस्ट्री के दिग्गजों से भी गाइडेंस मिल सके। इस इवेंट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल पार्टिसिपेंट्स की संख्या बीते संस्करणों के मुकाबले कहीं ज्यादा थी। साथ ही इस साल इसमें पार्टिसिपेट करने वाली इंजीनियरिंग टीमों ने अपने व्हीकल्स में बेमिसाल इंजीनियरिंग को नया आयाम देने की भरसक कोशिश की।
ऐसा होता है इस इवेंट में
हर एक टीम अपनी इंजीनियरिंग स्किल्स के प्रयोग से कस्टमाइज्ड व्हीकल तैयार करती है। टोटल एंट्रीज में से सेलेक्ट होने वाली टीमें अपने इन व्हीकल्स को रेसिंग ट्रैक पर दौड़ाते हैं। इस दौरान उन्हें दुर्गम रास्तो, पहाड़ों, कीचड़ आदि बाधाओं को पार करना होता है और अपने व्हीकल की ताकत को प्रदर्शित करना होता है। इसी आधार पर उनकी बेमिसाल इंजीनियरिंग तय होती है। 1000 पाॅइंट्स पर इंंजीनियरिंग की सफलता को मापा जाता है। इसमें से 600 पॉइंट एंड्योरेंस रन और 400 पॉइंट स्टेटिक और डायनैमिक इवेंट के होते हैं। आॅटो इंडस्ट्री के दिग्गज उनके व्हीकल और उसकी क्षमता को जज करते हैं।
क्या खास रहा इस बार के इवेंट में
इस बार दो तरह के इवेंट हुए। इनमें एक था एम बाहा और दूसरा था ई-बाहा। ई-बाहा का मतलब है इलेक्ट्रिक बाहा। बीते वर्षों के महिंद्रा बाहा एसएई इवेंट में इससे पहले तक ई-बाहा इवेंट नहीं होता था। इस नए प्रयोग के तहत इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को इस बार इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को भी प्रदर्शित करने का मौका मिला। ई-बाहा में इस बार कुल 11 कॉलेजेज की टीमों ने पार्टिसिपेट किया। इनमें से महज 9 टीमें ही फाइनल तक जगह बनाने में कामयाब हो सकीं। जबकि महज 6 टीमें ही फिनिशिंग लाइन तक पहुंच सकीं। महिंद्रा के आॅफिशियल्स आगामी वर्षों में ई बाहा को और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाने पर जोर देंगे।
'ऑटोमेटिव इंडस्ट्री को नया आयाम देने की है कोशिश'
बाहा एसएई इंडिया के कन्वेनर डॉ. सुधीर गुप्ते ने बताया कि महिंद्रा बाहा इवेंट एक कोशिश है भारतीय इंजीनियर्स की स्किल्स को एक कॉमन प्लेटफॉर्म मुहैया कराना और उनमें से बेस्ट इंजीनियर्स को सामने लाना। इसके बाद उनकी इंजीनियरिंग के दम पर ऑटोमेटिव इंडस्ट्री को एक नया आयाम देने की कोशिश रहती है।
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