भारत में गतिसीमा पर हो सकता है विचार
भारत की नयी सरकार छोटे लेकिन महत्त्वपूर्ण सुधार कर रही है। सरकार ने अब हमारी सड़कों पर वाहनों की रफ्तार के बारे में फैसला किया है। अभी देश की अलग-अलग सड़कों पर गतिसीमा भी अलग-अलग है। कई बार इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
आज सड़कों पर दौड़ने वाली कारें पुराने जमाने के मुकाबले ज्यादा आधुनिक हैं। हालांकि, भारत में ज्यादातर स्थानों पर गतिसीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया। भारत सरकार हर श्रेणी के वाहनों के लिए गतिसीमा बढ़ाने की योजना बना रही है।

सरकार कारों के लिए 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गतिसीमा लाने की योजना बना रही है। मोटरसाइकिलों और ट्रकों के लिए यह सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। क्वाड्रासाइकिलों के लिए सरकार 70 किलोमीटर प्रति घंटा की गतिसीमा लाने की योजना भी बना रही है।
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भारत में आखिरी बार गति सीमा 20 साल पहले सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय द्वारा बढ़ायी गयी थी। उन्होंने एक कमेटी भी बनायी थी जिसने वाहनों की गति सीमा पर पुर्नविचार करने की सिफारिश बरसों पहले कर दी थी।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और पैनल के सदस्य रवि बलूजा ने सूत्रों को बताया, "हमारा सुझाव है कि हाईवे की एक ही लेन में अलग अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अलग-अलग स्पीड लिमिट नहीं हो सकती। इसमें एक सामंजस्य होना जरूरी है।"
उन्होंने आगे कहा, "केंद्र सरकार अधिकतम गति सीमा तय कर सकती है, लेकिन यह स्थानीय संस्थाओं और एनएचएआई की जिम्मेदारी है कि एक ही रास्ते पर दुविधाजनक लिमिट न हो।"
फिलहाल एक्सप्रेसवे पर मोटरसाइकिलों को चलने की इजाजत नहीं है, क्योंकि दोपहिया वाहनों के लिए गति सीमा 50 किलोमीटर प्रति घंटा है। हालांकि, इस बात की उम्मीद है कि नयी स्पीड लिमिट आने के बाद मोटरसाइकिलें भी एक्सप्रेसवे पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी।


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