एसआईएम का सुझाव सभी पुरानी कारें हटाओ, सरकार ने दिया फिटनेस टेस्ट का प्रस्ताव
अगर नया सरकारी प्रस्ताव अमल में आया तो कई पुराने वाहनों को एक फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। इस टेस्ट के जरिये रोड पर उनकी कीमत का पता लगाया जा सकेगा।
पिछले सप्ताह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के केंद्रीय मोटर वाहन नियम-तकनीक की स्टेंडिंग कमेटी कांफ्रेंस में कहा गया कि निजी वाहनों की 15 वर्ष बाद जांच की जानी चाहिए। इसमें इसके बाद हर पांच वर्ष बाद जांच किये जाने का भी प्रावधान है।
इस जांच से यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि क्या वे वाहन निर्धारित उत्सर्जन और सुरक्षा सीमाओं के मानकों पर खरे उतरते हैं। व्यावसायिक वाहनों के लिए दो वर्ष बाद और उसके बाद वार्षिक जांच का प्रावधान सुझाया गया है।

इस प्रस्ताव को सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर (एसआईएएम) के पहले पेश किये गए प्रस्ताव के विकल्प में सुझाया गया था। इस संस्था ने कहा था कि 1996 से पहले बने सभी वाहनों का इस्तेमाल बंद किया जाना चाहिए।
एसआईएएम का तर्क था कि क्योंकि भारत में उत्सर्जन संबंधी नियम 1996 के बाद से प्रभाव में आए हैं, इसलिए इससे पहले बने वाहनों को सड़क से हटाकर प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
यह बात समझी जा सकती है कि एसआईएएम के इस प्रस्ताव का हर किसी ने विरोध किया। कई लोगों का यह भी मानना था कि यह नयी कारों की बिक्री बढ़ाने की एक चाल हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि इस कदम को अमल में लाने के लिए 60-70 लाख वाहनों को सड़कों से हटाना पड़ेगा।
फिटनेस टेस्ट अधिक व्यावहारिक समाधान लगता है। अमेरिका, और युनाइटेड किंगडम जैसे देशो में यही तरीका आजमाया भी जाता है।


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