भारतीय बाजार से निसान लेगी दैटसन गो को वापस
वैश्विक संस्था न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम (एनसीएपी) ने निसान को भारतीय बाजार से अपनी दैटसन गो को वापस मंगाने के लिए कहा है।
संस्था के चैयरमेन मैक्स मोस्ली निसान के कार्यकारी निदेशक कॉर्लोस गोस्न को निजी तौर पर खत लिखकर इस बारे में मांग की है। दैटसन गो के आधारभूत जांच टेस्ट में फेल होने के फौरन बाद मोस्ली ने इस कार की बिक्री फौरन बंद करने की मांग की है।
हाल ही में लॉन्च होने के बाद भी दैटसन गो में कोई स्ट्रक्चरल स्ट्रेंथ नहीं है। अगर कार किसी दुर्घटना का शिकार हो जाए, तो सवारी के बचने की कोई उम्मीद नहीं है। और तो और कार की बिल्ड क्वालिटी इतनी खराब है कि एयरबैग्स के बावजूद व्यक्ति की जान बच पाना बहुत मुश्किल होगा।

इस स्तर की कार को अमेरिका और यूके जैसे दुनिया के अधिकांश देशों में बिक्री की इजाजत नहीं मिलती। इन जैसे देशों में सुरक्षा स्तर पांच में से कम से कम चार सीटों पर होना चाहिये।
मैक्स का कहना है, "यह बहुत निराशाजनक है निसान ने इस दोयम दर्जे के बिलकुल नये कार मॉडल को लॉन्च करने की इजाजत दे दी। मैं निसान से अनुरोध करता हूं कि वह भारत में दैटसन गो की बिक्री को कार के बॉडी शैल को नये सिरे से डिजाइन करने तक रोक दे।"
उन्होंने कहा, "कॉर्लोस गोस्न को निसान के चैयरमैन और सीईओ के साथ ही यूरोपियन कार मैनुफेक्चर एसोसिएशन की जिम्मेदारी मिली है, तो अब उन्हें निसान और वाहन उद्योग में अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करना चाहिये। जो संयुक्त राष्ट्र की उन उम्मीदों के अनुसार है कि ऑटोमोबाइल उद्योग को एक दशक आगे की सोचकर सुरक्षा मापदण्ड तैयार करने चाहिये।"
एनसीएपी का कहना है कि सुरक्षा जांच में फेल होने के बाद कई कार कंपनियां यह तर्क देती है कि उनकी कारें स्थानीय नियमों के अनुसार होती हैं।
मैक्स को इस बात से भी नाराजगी है कि निसान के सीईओ ने उन्हें अभी तक उनके ऐसे किसी भी खत का जवाब नहीं दिया है, जिसमें विदेशों में बिकने वाली कारों की खामियों के बारे में बताया गया है।
निसान के एक प्रवक्ता ने कहा है, "दैटसन गो भारत में वाहन के न्यूनतम मानकों का पालन करती है। हमने कार को इस रूप में विकसित किया है कि यह स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतरीन साबित हो। इस कार में हमने बेस्ट इन क्लास ब्रेकिंग सिस्टम और अच्छी विजिबिलिटी ये लेकर ड्यूरेबिलिटी व आरामदेह सीट की सुविधा भी दी है। इसके साथ ही अधिक मोशन सिकनेस भी दी गयी है। इन सबका पैकेज सड़क दुर्घटना के संभावित खतरे को कम करता है।"

"तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में ऑटोमोटिव नियम लगातार विकसित हो रहे हैं और एक वैश्विक निर्माता होने के नाते हम भी उन परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाना चाहते हैं।"
दैटसन गो भारतीय बाजार में सुरक्षा जांच पर सबसे फिसड्डी मॉडल साबित हुआ है। अन्य कारों में मारुति सुजुकी स्विफ्ट, अल्टो 800, ह्युंडई आई10, फोर्ड फिगो, फौक्सवेगन पोलो और टाटा नैनो शामिल थीं ।
यह जांच भारत में बिकने वाले वाहनों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा यात्री वाहन निर्माता है।
जब शुरुआत में फौक्सवेगन पोलो इस जांच में फेल हुआ था, उन्होंने फौरन अपनी कार को भारतीय बाजार से वापस ले लिया था और फिर दो नये एयरबैग्स के साथ दोबारा लॉन्च किया था। जिससे कार को सुरक्षा में चार स्टार मिले।


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