लो प्रोफाइल टायरों की खूबियां और खामियां
आपने कितनी बार ऐसी कारें देखी हैं, जो सामान्य से बड़े पहियों और टायर पर दौड़ती नजर आती हैं। ये टायर आपकी कार में फिट टायरों से जरा अलग हटके होते हैं। हो सकता है कि आपने बहुत कम ही ऐसी कारें देखी हों, जिनमें इस तरह के टायर होते हैं। तो हमने सोचा कि क्यों न आपकी दुविधाओं का अंत किया जाए और इन टायरों पर थोड़ा प्रकाश डाला जाए।
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आप इन कारों में जो टायर देखते हैं वे वास्तव में बाजार में आने के बाद करवाया गया संशोधन होता है। इसमें बड़े व्हील रिम और लो-प्रोफाइल टायरों का इस्तेमाल किया जाता है। ये टायर सामान्य टायरों की अपेक्षा पतले होते हैं ताकि बड़े व्हील पुराने व्हील खांचे में ही सेट हो जाएं। हालांकि, ये टायर जरा हटकर नजर आते हैं, लेकिन इससे पहले कि आप इन्हें खरीदने के लिए दौड़ पड़ें कुछ बातों का खयाल जरूर रखना चाहिये।
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Bobenis

1. अपनी कार के टायर का साइज कैसे पढ़ें
हर टायर पर अन्य जानकारियों के साथ ही टायर का साइज भी लिखा होता है। आप टायर पर ये सभी जरूरी जानकारियां देख सकते हैं। फिलहाल हम सिर्फ टायर पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। टायर के साइज की जानकारी 305/30ZR19 के रूप में लिखी नजर आ सकती है। जिसका अर्थ होता है:
305: यानी मिलीमीटर में टायर की चौड़ाई
30: टायर के प्रोफाइल या पहलू अनुपात के बारे में जानकारी (अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़ें )
Z: टायर की स्पीड रेटिंग (यहां जेड रेटिंग का अर्थ है 300 किलोमीटर/घंटे से अधिक की रफ्तार )
R: रेडियल कंस्ट्रक्शन
19: टायर का व्यास इंच में

2. टायर प्रोफाइल क्या होता है
टायर प्रोफाइल टायर के साइडवॉल की गहरायी होती है या टायर के साइड की ऊंचाई होती है। इसे टायर की चौड़ाई के कुछ प्रतिशत के रूप में माना जाता है। हमारे उदाहरण में देखें, तो ( 305/30ZR19 टायर), प्रोफाइल या पहलु अनुपात बहुत कम यानी 30 है। इसका अर्थ है कि टायर के साइडवॉल की गहरायी 305 मिलीमीटर का 30 फीसदी है। लो प्रोफाइल टायरों का पहलु अनुपात आमतौर पर 60 से शुरू होता है। और जैसे-जैसे साइड वॉल पतली होती जाती है यह संख्या कम होती जाती है।
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3. लो प्रोफाइल टायरों का फायदा
ये टायर आपकी कार के लुक्स को शानदार तरीके से बढ़ाते ही हैं साथ ही हैंडलिंग और ग्रिप बेहतर हो जाती है, खासकर गर्मी के दिनों में। इसके साथ ही आपके कार की ब्रेक भी बेहतर हो जाती है। इसमें टायर का अधिक हिस्सा जमीन के साथ लगता है, इससे यह सामान्य टायर के मुकाबले अधिक कर्षण देता है। लो प्रोफाइल टायर आपकी कार के कॉर्नर को खूबियां देती है। टायर के कोने चौड़े होने के कारण यह कॉर्नर फोर्सेज का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं। इसके साथ ही स्टीयरिंग की क्षमता में भी इजाफा हम साफ तौर पर देख सकते हैं।

4. लो प्रोफाइल टायरों के नुकसान
भारतीय परिदृश्य के संदर्भ में लो-प्रोफाइल टायरों और रिम को पहुंचने वाला नुकसान अतिसंवेदनशील है। क्योंकि इन टायरों में हवा का दबाव कम होता है, इसलि यह खराब कंकड़-पत्थर वाली सड़कों पर इन टायरों से चलना बहुत मुश्किल हो सकता है। और क्योंकि इन टायरों का ज्यादा हिस्सा सड़क के संपर्क में रहता है इसलिए इनकी आवाज भी ज़्यादा होती है। ऐसे में आपकी कार की सवारी थोड़ी मुश्किल हो सकती है।

4. लो प्रोफाइल टायरों के नुकसान... (जारी है)
इन टायरों के साथ आपको बारिश के दिनों में अधिक सावधानी बरतनी पड़ती है। ये टायर गीले होने पर कम एक्वाप्लानिंग देते हैं। एक्वाप्लानिंग उस स्थिति को कहते हैं जब टायर और सड़क के बीच पानी की एक परत बन जाती है, इससे सड़क पर कार का कर्षण कम हो जाता है और ऐसे में कार के फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। फ्यूल इकॉनॉमी भी बढ़ जाती है और इतना ही नहीं, ये टायर महंगे हैं और इनकी कीमत सामान्य टायरों के मुकाबले काफी अधिक होती है।

5. जरूरी बात
यह बात ध्यान रखिये कि कार निर्माता वास्तविक टायरों के साइज में महज तीन फीसदी बढ़ाने की इजाजत देते हैं। इससे ज्यादा बढ़ाना उपरोक्त हैंडलिंग खूबियों से आपको महरूम कर देगी क्योंकि व्हील ओवरसाइज टायरों को संभाल नहीं पाएगा। इसके साथ ही आप अकसर इन टायरों के रबड़ उखड़े हुए देख सकते हैं, क्योंकि ये टायर व्हील वेल्स के कोने पर स्क्रैप भी डाल सकते हैं।
अगर आपको लगता है कि हम कुछ बताना भूल गए हैं या आप लो प्रोफाइल टायर से जुड़ा कोई निजी अनुभव साझा करना चाहते हैं तो नीचे टिप्पणी कर सकते हैं।
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Vulcho


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