उत्तर प्रदेश में पुराने वाहनों पर लगेगा ग्रीन टैक्स
तेजी से बढ़ रही वाहनों की संख्या को काबू करने और वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में 'ग्रीन टैक्स' लगाने का फैसला किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके लिए उत्तर प्रदेश मोटर वाहन अधिनियम में परिवर्तन लाने का आदेश भी जारी कर दिया है।
इसका अर्थ है कि 15 वर्ष से पुराने किसी भी वाहन पर 10 फीसदी अतिरिक्त कर लगाया जाएगा। इसे ही ग्रीन टैक्स का नाम दिया गया है।
एक अनुमान के अनुसार राज्य में 15 वर्ष से पुरान करीब 4.5 लाख वाहन हैं। इन सब वाहनों को एक बार फिर पंजीकृत किया जाएगा और इन पर ग्रीन टैक्स लगाया जाएगा। ग्रीन टैक्स की दरों का भी जल्द ही एलान कर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों ने ग्रीन टैक्स को लेकर अपनी आशंकायें जाहिर की हैं। सबसे मुख्य चिंता इसके मौजूदा प्रारूप को लेकर है। इसमें निजी वाहन व व्यावसायिक वाहन और अच्छे से मैंटेन किये गए वाहनों और अधिक धुंआ छोड़ने वाले वाहनों में किसी प्रकार का अंतर नहीं किया गया है।
15 वर्ष से पुराने निजी वाहनों की संख्या यातायात के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों के मुकाबले काफी कम हैं। ज्यादातर पुराने वाहनों का पर्यावरण और सड़क यातायात पर भारी दबाव पड़ता है। और तो और इस नये कानून से निजी कारें आमतौर पर अछूती रहती हैं।
हालांकि, जानकारों का मानना है, "टैक्स के ढांचे में बदलाव किये जाने की जरूरत है जहां न केवल गाड़ी की उम्र मायने रखे बल्कि इसके साथ ही उसमें इस्तेमाल की गयी तकनीक को भी मद्देनजर रखा जाए। इसके साथ ही पुराने वाहनों पर टैक्स लगाने के संबंध में नया और स्पष्ट ढांचा बनाया जाना चाहिए जहां पुराने वाहनों की उम्र के साथ-साथ अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर अधिक कर लगाया जाए।"


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