अम्बेस्डर की बिदाई के बाद सरकारी खेमे में जुडती अन्य कारें
हिन्दुस्तान मोटर्स द्वारा अम्बेस्डर कार के निर्माण को बंद करने की घोषणा के बाद, सरकार ने अन्य कारों को अपने खेमे में शामिल करने के लिए हरी झंडी दिखा दी है।
अम्बेस्डर कार को भारत सरकार के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन गिरती मांग एवं धन की कमी के कारण कंपनी ने मई महीने में इसके उत्पादन को बंद करने का फैसला लिया।
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वित्त मंत्रालय ने कुछ मापदंडों के तहत नई कारों को खरीदने की मंजूरी दे दी तथा यह भी निश्चित किया कि इन कारों की कीमत 4,75,000 रुपयों से कम हो। नई कारों को खरीदने में वाहनों की उपलब्धता, अनुरक्षण खर्च, क्षेत्र में सुविधाएं, ईंधन की खपत, पर्यावरण-अनुकूलता जैसे कई मापदंड शामिल हैं।

वित्त मंत्रालय की ओर से आई एक ताजा खबर यह है कि तय किए गए मापदंड़ों के तहत अधिकारी अपनी पुरानी अम्बेस्डर कार को अपनी पसंद की नई कार के साथ बदल सकते हैं।
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कई अधिकारियों ने मारुति सुजुकी स्विफ्ट डिजायर, एसएक्स4 एवं टाटा इंडिगो जैसी कारों की ओर अपना रुख कर लिया है। मारुति व टाटा भारत की लोकप्रिय कार निर्माता कंपनियां हैं। साथ ही, इनकी कारें निर्धारित बजट के अंतर्गत आती हैं तथा इनके खरखाव पर पड़ने वाला खर्च भी अन्य ब्रांडों की कारों की तुलना में काफी कम है।
परंतु, आज बाज़ार में इतने सारे विकल्प उपलब्ध हैं कि अभी भी कई सरकारी विभाग इस विषय पर कोई निर्णय नहीं ले पा रहे।


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