कार बेचने से पहले, क्रैश टेस्ट करना भारत में अनिवार्य
आप सभी जब भी कोई कार खरीदने की योजना बनाते हैं तो उसके लुक, मॉडल, फीचर्स और माइलेज के बाद जिस महत्वपूर्ण बात पर गौर करते हैं वो है कार की सुरक्षा और उसकी मजबूती। कार की बॉडी कितनी मजबूत है या फिर किसी भी आपात स्थिती में वो कार के भीतर बैठे लोगों के लिये कितनी सुरक्षित है इस बात की तश्दीक करना बहुत ही जरूरी है।
इसके लिये वाहन निर्माता कंपनियां किसी भी नई कार को बाजार में उतारने से पूर्व उक्त कार की मजबूती की जांच के लिये एक क्रैश टेस्ट अवश्य कराते हैं। इस टेस्ट को कई चरणों से होकर गुजरना होता है ताकि कार की बॉडी की मजबूती में कोई भी कसर ना रह जाये। इस परीक्षण में पास होने के बाद ही इन कारों को बाजार में पेश किया जाता रहा है।
लेकिन अभी तक केवल विदेशी वाहन निर्माता ही इस परीक्षण का प्रयोग अपनी कारों पर करते रहें हैं। लेकिन अब भारतीय वाहन निर्माताओं के लिये भी क्रैश टेस्ट करना भारत में अनिवार्य कर दिया जायेगा। इस बात को बहुत ही गंभीरता से लेते हुये भारत सरकार ने इस परीक्षण को अमली जामा पहनाने की योजना बनाई है।

क्यों जरूरी है कार क्रैश टेस्ट:
इस टेस्ट में किसी भी कार को लॉन्च करने से पूर्व उस कार को विभिन्न चरणों में क्रैश कराया जाता है। हर चरण में कार की गति और उस पर ड़ाले गये वजन में परिवर्तन किया जाता है। इसके बाद कार की स्थिती का जायजा लिया जाता है। इस परीक्षण में कार के भी डमी चालक को बैठाया जाता है और अधिकतम गति में कार को क्रैश कराया जाता है।
इस परीक्षण में पास होने के बाद ही कार को ग्राहकों के लिये बाजार में पेश किया जाता है। इसके पूर्व कार में अन्य जरूरी फीचर्स में बदलाव किया जाता है। ताकि सड़क पर किसी भी आपात स्थिती में कार के भीतर बैठे लोग सुरक्षित रह सकें। इस परीक्षण को भारतीय बाजार में अनिवार्य किये जाने से सड़क हादसे में होने वाली मौतों पर निश्चय ही अंकुश लगाया जा सकेगा।


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