कार उत्पादकों ने सीधे सीधे आठ महीने दाम में नहीं की बढ़ोत्तरी
भारत में मोटरगाड़ी निर्माता सीधे-सीधे आठ महीने से दाम बढ़ाने से बच रहे हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग कार खरीदें और कार निर्माताओं की बिक्री बढ़ सके।
भारत के सबसे बड़े कार उत्पादक मारुती सुजुकी ने दिसंबर 2013 से अपने किसी भी मॉडल के दाम में बढ़ोत्तरी नहीं की है।
साउथ कोरिया की कार उत्पादन कंपनी, ह्युंडई ने पिछली फरवरी दाम बढ़ाए थे। वह तब था जब सरकार ने राज्यकर घटाया था।
फरवरी में किये गए राज्यकर में 4 – 6 प्रतिशत कमी से मांग बढ़ी और इससे सरकार को ऑटोमोबाइल उद्योग में दामों पर काबू करने में मदद मिली। इससे दो साल से घटती बिक्री से उबरने के लिए भी उद्योग को मौक़ा मिला और इस सत्र के पहले हाफ में ज़्यादा कार बेचने में मदद मिली।

कंसल्टेंसी फर्म आईएचएस ऑटोमोटिव के मुख्य एनालिस्ट, अमित कौशिक ने कहा, "इस दशक के सबसे खराब स्लोडाउन ने कार बनाने वाली कंपनियों को भारत में अपने गेम प्लान को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है। ख़ास कर दाम का निर्धारण ऐश के विपरीत होता है और अभी अच्छे होते हुए मार्केट में कोई भी अपनी पोजीशन को कमज़ोर नहीं करना चाहता है।"
अप्रैल से सितम्बर के बीच उभरते हुए मार्केट ने करीबन 8.8 लाख पैसेंजर गाड़ी बेची जो साल भर पहले से 4.09 प्रतिशत अधिक है।
हालात को देखते हुए मारुती सुजुकी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा, "पिछले साल के मुताबिक़ डिस्काउंट करीबन 20 प्रतिशत ज़्यादा है पर फिर भी इस साल हमने दामों में बढ़ोत्तरी नहीं की क्योंकि वह ग्राहक की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना होगा। साथ ही राज्यकर घटाव के फायदे को ग्राहक तक पहुंचाने का नैतिक दबाव भी था।"


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