अफ्रीकी बाजार में भारतीय वाहनों का जलवा
अफ्रीका में नए वाहनों की मांग में तेजी का फायदा उठाते हुए भारतीय वाहन निर्माता कंपनियां अफ्रीका को किए जाने वाले निर्यात में तेजी से वृद्धि कर रही हैं। दक्षिण अफ्रीका के स्टैंडर्ड बैंक की पिछले सप्ताह जारी रिपोर्ट 'द अफ्रीका मैक्रो : इंडिया लीड्स इन अनलॉकिंग न्यू व्हिकल डिमांड इन अफ्रीका' के मुताबिक अन्य देशों के मुकाबले अफ्रीका में भारत की वाहन कंपनियां तेजी से प्रसार कर रही हैं।
2003 के बाद से भारतीय वाहन कंपनियों द्वारा अफ्रीका को किए जाने वाले निर्यात में 1000 फीसदी वृद्धि हुई है और 2008 के बाद से 160 फीसदी वृद्धि हुई है। अफ्रीका के पारंपरिक और ब्रिक्स के व्यापारिक साझेदारों के बीच यह सर्वाधिक तेज वृद्धि है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "2003 में भारत, अफ्रीका के लिए वाहन आयात का 12वां सबसे बड़ा स्रोत था, जबकि 2012 में यह छठे स्थान पर आ गया और इसने फ्रांस तथा ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ दिया।"
2008 के बाद भारत से अफ्रीका को होने वाले मोटरसाइकिल निर्यात में 175 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि कार निर्यात में 2003 के बाद से 2,400 फीसदी वृद्धि हुई है। इस खंड में 2008 के बाद से 160 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है।
भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स ने 1994 से अपने दक्षिण अफ्रीका स्थित संयंत्र में लगभग 70 करोड़ डॉलर का निवेश किया है और अफ्रीका में सबसे तेजी से विकास करने वाली वाहन कंपनियों में शामिल है। अन्य प्रमुख कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा के भी दक्षिण अफ्रीका में संयंत्र हैं। इनके अलावा मारुति सुजुकी, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस मोटर कंपनी जैसी भारत की वाहन कंपनियां भी अफ्रीका में तेजी से निर्यात बढ़ा रही हैं।


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