ऑटो जगत का मुनाफा रहेगा धीमां

इसका कारण इससे पिछले साल की समान अवधि में अत्यधिक ऊंची दर को बताया गया। वर्ष 2012-13 में भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग की आय वृद्धि दर पिछले पांच सालों में सबसे कम रही क्योंकि घरेलू वाहन कंपनियों की मांग में काफी कमी आई, निर्यात काफी कम रहा और रिप्लेसमेंट बाजार में बिक्री काफी कम रही।
आईसीआरए ने अपने बयान में कहा, "मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों और कारों के पुर्जो के आपूर्तिकर्ताओं पर सर्वाधिक बुरा असर पड़ा, जबकि हलके वाणिज्यिक वाहन और उपयोगिता वाहन खंड के आपूर्तिकर्ताओं पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ा।"
बयान के मुताबिक, उद्योग में छाई मुर्दनी के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन के कारण भी ऑटो कंपोनेंट विनिर्माताओं के लाभ में सात फीसदी गिरावट दर्ज की गई।


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