छोटी कारों ने की मारूति की नैया पार

Maruti Suzuki Swift
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारूति सुजुकी के बीते बीता वर्ष 2011 बहुत ही मुश्किल भरा रहा है। बीते वर्ष कंपनी को लगातार कई बार अपने कर्मचारियों की बेरूखी का सामना करना पड़ा जिसके चलते मारूति सुजुकी के मनेसर स्थित संयंत्र पर कई बार हड़ताले भी हुई। इस दौरान कंपनी की साख और शेयर दोनों में ही भारी गिरावट दर्ज की गई। लेकिन एक बार फिर से मारूति सुजुकी अपनी छोटी कारों के बदौलत पुरानी स्थिती में लौट चुकी है।

बीते वर्ष कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी लोकप्रिय हैचबैक कार स्विफ्ट का डीजल संस्‍करण पेश किया। लेकिन उस वक्‍त समय पर डिलीवरी आदि न हो पाने के कारण कंपनी को भारी नुकसान का समाना करना पड़ा। इसके अलावा मारूति सुजुकी ने 17 अगस्‍त को स्विफ्ट डीजल को पेश किया और ठीक 29 अगस्‍त को मनेसर स्थित संयंत्र में कर्मचारी नये युनियन की मांग को लेकर धरने पर बैठ गये और देखते-देखतें यह हड़ताल पुरे एक महिने तक जारी रही।

इस दौरान संयंत्र में कारों का उत्‍पादन कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हुआ और साथ-साथ कंपनी को लगभग 600 करोड़ रूपये की चपत भी लगी। उसके बाद अक्‍टूबर माह में भी कंपनी को हड़ताल का समाना करना पड़ा। लेकिन मारूति सुजुकी की इस शानदार कार स्विफ्ट ने बीते दिसंबर, जनवरी और फरवरी माह में बेहतरीन बिक्री दर्ज की और कंपनी के शेयी सुधार में भारी मदद की।

इसके अलावा अभी तक मारूति सुजुकी की बेस्‍ट सेलिंग कार के रूप में फर्राटा भर रही वैगनआर को भी स्विफ्ट ने पीछे छोड दिया। आपको बता दें कि कंपनी अपने इस कार को पेश करने से पूर्व ही स्विफ्ट की कुल 50,000 इकाईयों की बुकिंग दर्ज कर चुकी थी। मारूति सुजुकी की स्विफ्ट, वैगनआर, अल्‍टो, रिट्ज जैसी कारों की बदौलत एक बार फिर से बाजार में अपनी स्थित मजबुत कर चुकी है। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 के शुरूआत में कंपनी के शेयर लगभग 45 प्रतिशत थे, जो वर्ष के मध्‍य में गिरकर 28 प्रतिशत पर आ गये थे। लेकिन छोटी कारों ने मारूति सुजुकी में एक बार फिर से जान फूंक दी और वर्तमान में कंपनी के शेयर बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक हो चुके है।

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Article Published On: Friday, March 9, 2012, 16:20 [IST]
English summary
Maruti Suzuki had a forgettable 2011 as it saw its market share dip to the lowest ever levels in 20 years. The Indian carmaker saw its sales drop considerably after deliveries were delayed by incessant strikes at its Manesar plant. The launch of the new Swift did not prove to be helpful too as huge demand for the car along with the ongoing strike meant many buyers switched to other brands. Maruti Suzuki’s market share had hit as low as 28 per cent from its formidable position of 45 per cent in the beginning of 2011.
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