करीब 80,000 रुपए महंगी होंगी डीजल कारें!

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री एस. जयपाल रेड्डी ने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से आगामी बजट में डीजल की गाडि़यों पर 80,000 रुपये अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की सिफारिश की है। रेड्डी ने वित्तमंत्री को दिये गये बजट पूर्व सुझाव में यह भी कहा है कि तेल और गैस की खोज तथा इस क्षेत्रा में लगने वाली रिफाइनरियों को 10 साल तक कर छूट दी जानी चाहिये।
रेड्डी ने आज दोपहर यहां वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने तेल एवं गैस क्षेत्रा से जुड़ी मांगों की लंबी सूची उनके समक्ष रखी। वित्त मंत्री इन दिनों वर्ष 2012-13 के बजट की तैयारियों में लगे हैं और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनके सुझावों पर गौर कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि मुलाकात के दौरान रेड्डी ने डीजल से चलने वाली कार पर 80,000 रुपये अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने के लिये कहा ताकि अर्थव्यवस्था के डीजलीकरण को रोका जा सके।
डीजल कारों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क से प्राप्त राजस्व को तेल कंपनियों की इधन सब्सिडी की भरपाई में इस्तेमाल किया जा सकता है। तेल मंत्रालय ने तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात पर पांच प्रतिशत आयात शुल्क समाप्त करने की भी मांग की है ताकि उर्वरक और बिजली जैसे बुनियादी जरुरत वाले क्षेत्रों में इधन लागत कम की जा सके।
पेटोलियम मंत्री ने कच्चे तेल और पेटोलियम पदार्थों को भी प्रस्तावित वस्तु एवं सेवाकर :जीएसटी: कानून के दायरे में रखने पर जोर दिया। फिलहाल कच्चा तेल, पेटोल, डीजल और एटीएफ को जीएसटी दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है। इससे इन पदार्थों पर केन्द्र और राज्यों के कर मौजूदा दर पर लगते रहेंगे। मंत्रालय ने अपनी बहुत पुरानी मांग को भी इस बार दोहराया है। पेटोलियम मंत्राी ने प्राकृतिक गैस और एलएनजी को घोषित उत्पादों की श्रेणी में रखने की भी मांग की ताकि इनपर समान पांच प्रतिशत की दर से बिक्री कर लग सके। मौजूदा व्यवस्था में इन पर अलग अलग राज्यों में अलग दर से बिक्री कर लगता है।


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