गुजरात बना देश का ऑटो हब
भारतीय बाजार में आये दिन वाहनों की संख्या में इजाफा देखनें को मिल रहा है साथ ही भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार भी नित नये किर्तिमान रच रहा है। उम्मीद है कि आगामी 2020 तक भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार भी बन सकता है। देश की इस सफलता के पीछे कुछ राज्यों की सरकार की नीतियां बेहद महत्वपूर्ण है उनमें से ही एक राज्य गुजरात है।
हाल ही के दिनों में गुजरात राज्य देश के एक बड़े ऑटो हब के रूप में उभरा है, इसके पीछे न केवल वाहन निर्माताओं को हाथ है बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता भी इसे सफल करने में पूरा सहयोग कर रही है। किसी भी राज्य का विकास उसके मुखिया पर सबसे पहले नीहित होता है। कुछ ऐसा ही गुजरात राज्य में भी देखनें को मिल रहा है।
जी हां गुजरात राज्य पर देश के सभी वाहन निर्माताओं की नजरें आ गड़ी है। इस समय गुजरात में देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स अपनी नन्ही नैनो को उत्पादन सानंद संयंत्र में कर रही है। इसके अलावा दुनिया की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स एक अर्से से अपने वाहनों का उत्पादन गुजरात से कर रही है।
गुजरात में राज्य सरकार की बेहतरीन नीतियों और नरेंद्र मोदी द्वारा कंपनियों के स्वागत किये जानें के कारण दूसरे कार निर्माता भी गुजरात में संयंत्र शुरू करने की योजना बना रहें है। हाल ही में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारूति सुजुकी ने भी गुजरात में अपने नये संयंत्र के शुरूआत की घोषणा की थी। इसके अलावा हीरो मोटो कार्प, प्यूजियोट सिट्रोन भी गुजरात में अपने नये संयंत्र की योजना पर काम कर रहें है।
अमेरिका की प्रमुख कार निर्माता कंपनी फोर्ड ने तो गुजरात में अपने नये संयंत्र के लिए निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया है और उम्मीद है कि आगामी कुछ वर्षो में वहां पर कारों का उत्पादन कार्य भी शुरू कर दिया जायेगा। आपको बता दे कि गुजरात के मुख्यमंत्री के बेहतरीन नीतियों के चलतें राज्य में न केवल एक से बढ़कर एक वाहन निर्माता कदम रख रहें है साथ ही राज्य के युवाओं को रोजगार का भी खुब मौका मिल रहा है।
शायद यही कारण है कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में दिनों दिन बढ़ोत्तरी हो रही है। वहीं यदि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नीतियों पर गौर करें तो यह बेहद ही अलग हैं। टाटा मोटर्स ने सिंगूर में अपने संयंत्र पर पूरा काम खत्म कर दिया था अब बस वहां पर कारों का उत्पादन कार्य शुरू किया जाना था लेकिन राज्य सरकार ने सत्ता में आने के बाद सिंगूर की भूमि को वापस लेनें की मांग कर बैठी और टाटा मोटर्स का जमकर विरोध किया।
खैर यह तो एक राजनीतिक विषय है जिसका यहां पर सरोकार करना उचित नहीं होगा। गुजरात में वाहन निर्माताओं द्वारा रूख किये जानें का सबसे बड़ा कारण यह है कि वहां पर उनका स्वागत खुद सरकार द्वारा किया जा रहा है। साथ ही गुजरात में बंदरगाहों के कारण वाहन निर्माताओं को अपने व्यापार में और भी ज्यादा सहूलीयत मिल रही है। शायद यही कारण है जिससे आने वाले समय में गुजरात देश का एक बड़ा ऑटो हब बनकर उभरेगा।


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