डीजल कारें 2.55 लाख रुपये तक होंगी महंगी
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार अभी पेट्रोल की कीमत में लगी साढे साती की मार झेल ही रहा था कि ऑटोमोबाइल उधोग पर सरकार की नीतियों दोहरी मार पड़ने जा रही है। यह मार न केवल ऑटोमोबाइल उधोग जगत पर पड़ेगा बल्कि आम आदमी की जेब भी कट जोयेगी। जी हां सरकार इस बार डीजल कारों को भी महंगा करने की योजना बना रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम मंत्री जैयपाल रेड्डी ने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखकर डीजल कारों पर एक्साईज ड्यूटी बढ़ाने की मांग की है।
गौरतलब हो कि रेड्डी ने अपने पत्र में लिखा है कि सरकार को डीजल कारों पर अतिरिक्त उत्पादन शुल्क बढ़ाना चाहिए। इसके लिए उन्होनें छोटे डीजल कार यानी की हैचबैक पर 1.7 लाख रुपये और मध्य आकार यानी की सिडान के साथ साथ बड़े वाहन जैसे कि एसयूवी, एमयूवी पर लगभग 2.55 लाख रुपये अतिरिक्त एक्साईज ड्यूटी बढ़ाने की मांग की है।

आपको बता दें कि हाल ही के दिनो में पेट्रोल की कीमत में आये उछाल के कारण देश में पेट्रोल कारों की मांग घट गई है और डीजल वाहनों की मांग में जबरजस्त इजाफा हो गया है। इसके वजह से देश में डीजल की खपत भी पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा हो गई है। अब सरकार का मानना है कि डीजल की मांग बढ़ने के कारण सरकार को ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। क्योंकि सरकार पहले से ही प्रतिलीटर डीजल पर लगभग 12.53 रुपये का नुकसान झेल रही है।
अब देश में डीजल कारों की मांग के साथ ही डीजल की मांग बढ़ने के कारण सरकार को ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। यदि बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष डीजल और पेट्रोल की मांग में आये भारी अंतर पर गौर करें तो, बीते वर्ष 2010-11 में देश में डीजल का प्रयोग लगभग 6.2 प्रतिशत बढ़ा था वहीं इस वर्ष 2011-12 में डीजल का प्रयोग लगभग 7.2 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इसके अलावा डीजल की मांग बढ़ी है उसी हिसाब से देश में पेट्रोल की मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बीते वर्ष 2010-11 में देश में पेट्रोल का उपभोग लगभग 10.7 प्रतिशत था जो कि इस वर्ष 2011-12 में घटकर मात्र 5.6 प्रतिशत ही रहा गया है।


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