माइकल ने रेस की दुनिया को कहा अलविदा, तस्वीरों के साथ जानिए शुमाकर की जिंदगी
उनकी स्पीड, ट्रैक पर हौसले और जीत के विशाल रिकार्ड के सामने दुनिया भर के रफ्तार के जंगियों के हौसले पस्त हो जातें हैं। 20 वर्षो से भी ज्यादा स्पीड को दुनिया से जुड़े रहने के बाद अब फार्मूला वन रेस के महान रेसर माइकल शुमाकर ने अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी है। हाल ही में माइकल शुमाकर ने इस बात की घोषणा कर सबको चौंका दिया कि वो इस सिजन के आखिरी रेस के बाद रेस ट्रैक को अलविदा कह देंगे।
आपको बता दें कि इस सिजन की आखिरी रेस 25 नवंबर को होगा। इसी दिन ब्राजिल ग्रांड प्री रेस के दौरान शुमाकर आखिरी बार रेस ट्रैक पर रफ्तार से जंग करते देखें जायेंगे। उम्र के 43 बसंत देखने के बाद भी शुमाकर आज जिस शिखर पर हैं ऐसा बहुत ही कम खिलाडि़यों में देखने को मिलता है। लेकिन अपने बुलंद हौसले और बेहतरीन कान्फिडेंस के कारण आज भी दुनिया के बेहतरीन ड्राइवरों के छक्के छुड़ाने में शुमाकर माहिर है। तस्वीरों के माध्यम से जानिए शुमाकर के रेसिंग सफर के बारें में।

माइकल शुमाकर का शुरूआती जीवन
माइकल शुमाकर एक बेहद ही साधारण परिवार से सम्बंध रखतें हैं। जी हां उनके पिता पेशे से एक राज मिस्त्री थें और उस दौरान उनके घर की माली हालत कुछ खास नहीं थी। लेकिन शुमाकर को बचपन से ही रेसिंग और स्पीड दोनों से बहुत प्रेम था। उनका यही जज्बा उनके पिता को पसंद था। इसी के चलते उनके पिता ने उनके पैडल कार्ट में मोटरसाइकिल का इंजन लगा दिया था जिससे वो रेसिंग करतें थे। इतना ही नहीं शुमाकर ने महज 6 वर्ष की उम्र में ही पिता द्वारा दिये गये एक पुराने कार्ट से कॉर्ट क्लब चैम्पियनशिप जीती थी।
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शुमाकर का विवादों का सफर
यह सच है कि जब कोई आम इंसान कम समय में ही उंचाईयों को छुने लगता है तो दुनिया में उसका एक रिश्ता विवादों से भी बन जाता है। कुछ ऐसा ही शुमाकर के साथ भी हुआ था। सन 1994 में जब उन्होंने पहला रेस जीता तो यह अफवाह उठी थी कि बेनेटेन टीम के कम्प्युटर सॉफ्टवेयर में कुछ विशेष प्रकार की प्रणाली लगी थी। 1996 में शुमाकर पर जाक बिलेनव को ट्रैक से हटाने का आरोप लगा। इसके अलावा शुमाकर के बारें में ऐसा भी कहा जाता है कि वो रेस के दौरान कई बार अक्रामक भी हो जातें हैं। खैर जो भी इन सभी विवादों के बावजूद भी शुमाकर 20 वर्ष से भी ज्यादा रेस की दुनिया से जुड़ें रहें।

शुमाकर बने 'रेन किंग'
एफ1 रेसिंग में सबसे बेहतरीन ड्राइवर उसे माना जाता है जो कि बारीश के दौरान भी संयमित तरीके से और रफ्तार के साथ कार ड्राइव करे। इस मामले में भी शुमाकर का हाथ पकड़ने वाला अभी तक कोई नहीं हैं। जी हां सन 2003 में शुमाकर ने बारीश के दौरान हुई 30 रेसो में से कुल 17 रेसों में जीत दर्ज की थी। यही कारण था कि उन्हे फार्मूला वन रेसिंग का रेन किंग भी कहा जाता है।

रेस के बेताज बादशाह माइकल शुमाकर
माइकल शुमाकर एक ऐसा नाम है जिसने एफ1 रेसिंग से दुनिया को परीचित कराया था। सन 1996 में जब शुमाकर ने फेरारी ज्वाइन किया था उस दौरान फेरारी कंपनी और फार्मूला वन रेसिंग दोनों ही खासे नुकसान के दौर से गुजर रहें थे। लेकिन इस दौरान शुमाकर फेरारी ज्वाइन कर कंपनी और एफ1 वन रेसिंग दोनों को ही एक नया जीवन दिया था। शुमाकर अब अपने जीवन के कुल 19 सिजन में लगभग 91 रेस जीत चुके है।

रिकार्डों के आइने में शुमाकर
माइकल शुमाकर एक ऐसे रेसर रहें हैं जिसे ट्रैक पर देखकर अन्य विरोधियों के हौसले खुद-बखुद डगमगा जातें थें। शुमाकर विश्व के इकलौते रेसर हैं जिसने कुल 7 बार वर्ल्ड चैम्पियनशिप अपने नाम किया है। शुमाकर के इस रिकार्ड के आस-पास भी पहुंच पाना किसी भी रेसर के लिए बहुत बड़ी बात है। शुमाकर ने सन (1994, 1995, 2000, 2001, 2002, 2003, 2004) की वर्ल्ड चैम्पियनशिन जीती है।

ट्रैक पर शुमाकर
माइल शुमाकर आखिरी समय में भी पूरे खेल का सेनेरियो बदलने में माहिर थें। ट्रैक पर यदि वो लंबे समय से पिछे रहतें थे फिर भी आखिरी पलों में वो आश्चर्यजनक तरीके से रेस में सबसे आगे हो जातें थें। सही मायनों में शुमाकर ने रेसिंग की दुनिया में जो योगदान दिया है उसकी तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती है।

दो दिग्गजों 'सचिन और शुमाकर' का साथ
माइकल शुमाकर जिस तरह दुनिया भर में रेसिंग के लिए मशहूर हैं, साथ ही उनका दोस्ताना व्यवहार भी लोगों को काफी याद आयेगा। जी हां दुनिया के दो अलग खेलों के दिग्गज, रेसिंग वर्ल्ड के शुमाकर और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन की दोस्ती भी काफी गहरी है।

शुमाकर में अभी भी है दम
शुमाकर के रिटायरमेंट के पिछे ऐसा कोई कारण नहीं है कि वो अब ट्रैक पर उतने मजबूत नहीं हैं। उन्होंने अपने रिटायरमेंट को घोषित करने के दौरान यह बात कही थी कि अभी भी वो बेस्ट ड्राइवर्स का सामना करने में सक्षम हैं।
लगातार 7 बार फार्मूला वर रेस के विश्व चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम करने वाले शुमाकर के लिए यहां तक कहा जाता है कि, उनके जैसे कॉन्फिडेंट और हमेशा फिट रहने वाला खिलाड़ी दूसरा कोई नहीं हैं। निश्चय ही शुमाकर ने फार्मूला वन रेसिंग को दुनिया से परिचित कराने में अहम भूमिका निभाई। वर्तमान पिढ़ी ने तो अपने बचपन में केवल शुमाकर का नाम ही सुना था, और आश्चर्यजनक तरीके से फार्मूला वन रेसिंग से जुड़ गया था।


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