अब डीजल गाड़ियों पर पड़ेगी टैक्स की मार

Maruti Suzuki Swift
नई दिल्ली। सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट ने डीजल गाड़ियों पर अडिशनल टैक्स लगाने की मांग की है। संस्था का कहना है कि यह फ्यूल सरकारी खजाने को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इस मांग से कार कंपनियां खफा हैं। दिल्ली के एनजीओ ने छोटी डीजल गाड़ियों पर 81,000 रुपए और डीजल से चलने वाले मल्टी-यूटिलिटी वीकल और स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीकल पर इससे दोगुना टैक्स लगाने की मांग उठाई है।

सरकारी तेल कंपनियां डीजल पर 14.57 रुपए प्रति लीटर की सब्सिडी देती हैं। इसके एक हिस्से की भरपाई सरकार करती है। पेट्रोल महंगा होने से डीजल गाड़ियों की बिक्री काफी ज्‍यादा बढ़ गयी है। 4 लाख रुपए से ज्यादा में आने वाली 60 फीसदी से ज्‍यादा गाड़ियां डीजल से चलती हैं। मारुति स्विफ्ट और ह्यूंदै वरना के डीजल मॉडल की डीमांड इतनी है कि बुकिंग के बाद ग्राहकों को इंतजार करना पड़ रहा है।

सोसाइटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के डायरेक्टर सुगातो सेन ने कहा कि इंडस्ट्री परफॉर्मेंस, इमिशन और सेफ्टी के सभी मानकों को पूरा कर रही है, इसलिए डीजल को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। और वहीं ऑटो कंपनियों का कहना है कि इस बारे में जल्दबाजी में किया गया फैसला इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचाएगा।

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Article Published On: Thursday, January 26, 2012, 17:58 [IST]
English summary
Diesel car buyers may have to shell out more with the Finance Ministry considering the imposition of higher excise duty on such vehicles in the upcoming Budget.
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