इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार हुई धीमीं

पिछले दो-तीन माह में 275 इलेक्ट्रिक वाहन डीलर अपनी दुकानें बंद कर चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के संगठन (एसएमईवी) के निदेशक सोहिंदर गिल ने कहा, हमने ग्राहकों को इस योजना की आखिरी तारीख तक इस प्रोत्साहन का लाभ देना जारी रखा। 31 मार्च, 2012 तक नवीन एवं अक्षय उर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के पास हमारा बकाया 32 करोड़ रुपये का हो गया है। एमएनआरई द्वारा दिसंबर, 2010 में शुरू की गई इस योजना के तहत सरकार ने शेष बची 11वीं योजना की अवधि में देश में बिकने वाले प्रत्येक इलेक्ट्रिक वाहन पर यह प्रोत्साहन देने की घोषणा की थी।
इस तरह सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन पर 2010-11 और 2011-12 में यह प्रोत्साहन देना था। इसके अलावा भारी उधोग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन नीति की वजह से एमएनआरई की योजना को बंद करना पड़ा है, क्योंकि किसी एक क्षेत्र के लिए सरकार के दो प्रोत्साहन कार्यक्रम एक साथ नहीं चलाए जा सकते। गिल ने कहा कि एमएनआरई मदद करना चाहता है, लेकिन उसे वित्त मंत्रालय से फंड नहीं मिला है।
बिक्री के बारे में उन्होनें कहा, अप्रैल माह से इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री 75 फीसद घटकर 3,000 इकाई मासिक रह गई है। पहले हर महीने 7,000 इलेक्ट्रीक दोपहिया बिक रहे थे। वहीं दूसरी ओर महिन्द्रा रिवा ने इस वित्त वर्ष में एक भी इलेक्ट्रिक कार नहीं बेची है। उन्होनें बताया कि इस योजना के बंद होने के बाद दोपहिया की कीमत बढ़कर 29,000 से 40,000 रुपये हो गई है। पहले इनका दाम 19,000 से 29,000 रुपये के बीच था। इसी तरह इलेक्ट्रिक कार का दाम एक लाख रुपये बढ़कर 4.5 लाख रुपये हो गया है। उन्होनें कहा कि धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री घट रही है।


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