कारों की रफ्तार हुई धीमीं
बजट में उत्पाद शुल्क बढ़ने से कारें महंगी होने और ईंधन की कीमतों को लेकर अनिश्चितता के चलते अप्रैल का महीना ज्यादातर कार कंपनियों के लिए निराशाजनक रहा और इस दौरान मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, जनरल मोटर्स सरीखी कंपनियों की बिक्री या तो गिरी या फिल मामूली रूप से बढ़ी।
अप्रैल, 2012 में देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी की कुल बिक्री 3.4 प्रतिशत बढ़कर 1,00,415 कारों की रही, जबकि बीते साल अप्रैल में कंपनी ने 97,155 कारें बेची थी। इस दौरान, दूसरी सबसे बड़ी कार कंपनी ह्युंडई ने मई दिवस की वजह से आज बिक्री के आंकड़े जारी नहीं किए।
तीसरी सबसे बड़ी कार कंपनी टाटा मोटर्स के यात्री वाहनों की बिक्री अप्रैल, 2012 में 7 प्रतिशत घटकर 23,658 इकाइयों की रही जो अप्रैल, 2011 में 25,436 इकाइयों की थी। छोटी कार नैनो की बिक्री 20 प्रतिशत घटकर 8,028 कारों की रही। वहीं, जनरल मोटर्स इंडिया की बिक्री बीते माह 20.34 प्रतिशत घटकर 8,005 कारों की रही, जबकि बीते साल अप्रैल में कंपनी ने 10,050 कारें बेची थीं।
जीएम इंडिया के उपाध्यक्ष पी. बालेन्द्रन ने कहा, ईंधन मूल्यों में अनिश्चितता, उत्पाद शुल्क में वृद्धि और कुछ राज्यों में स्थानीय करों में वृद्धि से वाहन बाजार पर दबाव बना हुआ है जिससे बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इसके अलावा कुछ वाहन कंपनियों के लिए बीता अप्रैल माह थोड़ा बेहतर रहा जिसमें टोयोटा किर्लोस्कर और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा शामिल हैं।
इस दौरान टोयोटा किर्लोस्कर मोटर की बिक्री 49 प्रतिशत बढ़कर 14,378 वाहनों की रही, जबकि बीते साल अप्रैल में कंपनी ने 9,681 वाहनों की बिक्री की थी। इसी तरह, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा की बिक्री 27 प्रतिशत बढ़कर 40,719 इकाइयों की रही, जबकि कंपनी ने बीते साल अप्रैल में 32,090 वाहनों की बिक्री की थी।


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