कार निर्माताओं की नजर डीजल कारों पर
पेट्रोल की कीमतों में आये उछाल के कारण कार निर्माताओं की नजरें डीजल कारों पर जा गड़ी है। पेट्रोल की कीमत बढ़ जाने के कारण पिछले वर्ष से ही देश में डीजल कारों की मांग बढ़ गई है। वहीं हाल ही में अचानक पेट्रोल की कीमत में हुए साढ़े साती (7.50) इजाफे ने डीजल कारों के प्रोजेक्ट में और भी तेजी ला दी है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारूति सुजुकी और दूसरे स्थान पर अपना कब्जा जमाये कोरियन कार निर्माता कंपनी ह्युंडई देश की सड़कों पर ज्यादा से ज्यादा डीजल कारों को उतारने की योजना में मशगुल हो गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह दोनों की कंपनियां अपने उन मॉडलों पर काम कर रही है जिनके डीजल वैरिएंट नहीं है। इसके अलावा कंपनियां कुछ नये डीजल मॉडलों को भी पेश करने की सोच रही है।
इस समय देश का ऑटोमोबाइल बाजार डीजल पर ही निर्भर होता नजर आ रहा है। आपको बता दें कि देश में डीजल कारों की मांग इस कदर हो गई है डीजल मॉडलों की वेटिंग पीरियर 6 से 8 माह तक बढ़ गये है। हाल ही में मारूति सुजुकी ने अपनी पहली एमपीवी एरटिगा को पेश किया था जिसमें कंपनी ने डीजल और पेट्रोल दोनों वैरिएंट को उतारा लेकिन सबसे ज्यादा मांग डीजल एरटिगा की है।
गौरतलब हो कि एरटिगा ने लॉन्च होनें के भीतर ही 40,000 के बुकिंग का आंकड़ा पार कर लिया है। वही पिछले वर्ष कंपनी ने अगस्त माह में अपनी लोकप्रिय हैचबैक कार स्विफ्ट के डीजल संस्करण को पेश किया था जिसने एक माह के भीतर ही 50,000 इकाईयों की बुकिंग का आंकड़ा दर्ज किया था। लेकिन उसी वक्त कंपनी के मनेसर संयंत्र में हुए लगातार हड़ताल के कारण कंपनी का उत्पादन कार्य बुरी तरह लड़खड़ा भी गया था।
खैर उस वक्त कंपनी ने इतालवी कार निर्माता कंपनी फिएट से एक साल में एक लाख डीजल इंजनों की खरीद का अनुबंध तय कर मामलें को किसी तरह संभालने की कोशिश की है। उस दौरान देश के कार निर्माताओं ने पेट्रोल वैरिएंट पर एक से बढ़कर एक शानदार ऑफर भी पेश किये ताकि ग्राहकों की नजर पेट्रोल वैरिएंट की तरफ की जा सके इसमें कुछ कार निर्माता सफल भी हुए लेकिन एक बार फिर वही स्थिती देश के सामने आ चुकी है।
अब कार निर्माताओं ने एक बार फिर पेट्रोल वैरिएंट के स्टॉक को क्लीयर करने के लिए ऑफरो की झड़ी लगा दी है। लेकिन देखना यह है कि इस बार स्थिती किस मोड़ पर जाकर सुधरती है। रही बात देश में डीजल कारों को पेश करने की तो इस प्रोजेक्ट में कंपनियों ने अपने घोड़े खोल दिये है और इसी क्रम में देश को एक से बढ़कर एक डीजल कारों को चुनने का मौका एक बार मिलेगा।
देश की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी ह्युंडई ने भी देश में अपने डीजल कारों के मॉडलों पेश करने की योजना में तेजी ला दिया है। आपको बता दें कि किफायती कारों के मामलें में मारूति सुजुकी के बाद ह्युंडई को ही घरेलु बाजार में प्राथमिकता दी जाती है। इस समय ह्युंडई दक्षिण कोरिया से डीजल इंजनों को आयात कर देश के बाजार में ला रहा है।
हाल ही में ह्युंडई इंडिया के मार्केटिंग हेड अरविंद सक्सेना ने बताया था कि इस समय भारतीय बाजार में डीजल कारों की जबरजस्त हवा चली है चारों तरफ डीजल कारों को ही ग्राहक प्राथमिकता दें रहें है और इसका मात्र कारण देश में पेट्रोल की कीमत में आया भारी उछाल है।
उन्हानें बताया कि कंपनी देश में ही एक नये डीजल इंजन संयंत्र को शुरू करने की योजना पर काम कर रही है जिसकी क्षमता लगभग 1.5 इकाई प्रतिवर्ष होगी। अब आप इसी बात से अंदाजा लगा सकतें है कि किस कदर देश में कार निर्माता डीजल कारों के लिए बेसब्र हो चुके है। आने वाले समय में देश में डीजल कारों की बाढ़ सी आ जायेगी।
डीजल न केवल किफायती बल्कि खतरनाक भी:
क्या आप जानतें है कि डीजल जिस कदर किफायती है उसी कदर खतरनाक भी है। जी हां डीजल कारें आपकी जेब पर हर रोज पड़ने वाले भार को तो हल्का करती है लेकिन हमारे पर्यावरण के लिए यह घातक भी सबसे ज्यादा है। वैसे ही देश भर में व्यवसायीक वाहनों की संख्या में हो रहे इजाफे के कारण देश में प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ रही है। यदि इसी में घरेलु प्रयोग में लाई जाने वाले वाहनों में भी डीजल कारों को चुना जायेगा तो बेशक यह समस्या और भी गंभीर रूप धारण कर लेगी।
लेकिन पेट्रोल में लगी इस आग के सामने हम सभी बेबस है। इस समस्या का सिर्फ एक ही निपटारा है कि सरकार इन बातों पर गौर कर पेट्रोल की कीमत में कमी करें ताकि लोग आसानी से पेट्रोल कारों की तरफ अपना रूझान कर सकें। आप डीजल कारों के भारी प्रयोग के बारें में क्या सोचतें है? आपकी इस लेख पर क्या राय नीचे दिये कमेंट बॉक्स में अपनी महत्वपूर्ण राय देकर अपना विचार अवश्य दें।


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