कार कंपनियां और विदेशी मॉडल्स, चोली दामन का साथ

इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ दर्शकों का ध्यान कार के बजाए इन बालाओं पर ही रहता हैं। कार की लांचिंग के दौरान ये बालाए भी बिलकुल सधे हुए खिलाडि़यों के भांति अपने लटके-झटके से लोगों का ध्यान अपनी तरफ करने में लगी रहती हैं। एक बात जो गौर करने वाली होती है, वो यह कि किसी भी वाहन के पेश होने के दौरान दर्शकों का एक भारी हूजूम तो मौजूद होता है लेकिन बहुत कम लोग ही वाहनो के फिचर्स और अन्य बतों में दिलचस्पी लेतें हैं।
इनमें से कुछ लोग बारे भी हो जाते है, और अपनी जगह छोड़ने लगते हैं। यही वो समय होता है जब इन बालाओं की सख्त जरूरत पड़ती है, और ये बालाऐं अपनी अदाओं से लोगों का ध्यान एक बार फिर वाहन की तरफ करने में सफल हो जाती हैं। आपको बता दें कि हाल ही में ऑडी ने जब भारतीय बाजार में ए8एल और ए6 को पेश किया था, उस दौरान कार के लाचिंग के दौरान विदेशी मॉडलों का भी बखूबी प्रयोग किया गया था।
इतना ही नहीं विज्ञापनों में भी इन मॉडलों ने अपना सिक्का जमा लिया हैं। हाल ही में ह्युंडई ने वरना के एक विज्ञापन में, तथा टाटा ने आरिया के विज्ञापन में एक विदेशी मॉडल जो कि एक खुफिया एजेंट बनी होती हैं, इनका इस्तेमाल किया हैं। आखिर इस तरह से वाहनो प्रचारित करने के लिए विदेशी बालाओं की जरूरत क्यों पड़ती हैं। आइऐं जानते है इसके बारें में।
इस बारें में मारूति सुजुकी के वरिष्ठ अधिकारी शशांक श्रीवास्तव का कहना है कि, इस तरह के विदेशी मॉडलों के प्रयोग से ज्यादा से ज्यादा लोग आसानी से विज्ञापन और लांचिंग की तरफ आकर्षित होतें है, और वाहन पर ध्यान देतें हैं। इसके अलावा ह्युंडई मोटर्स के मार्केटिंग और सेल्स के प्रबंध निदेशक अरविंद सक्सेना का कहना है कि जब आप किसी वैश्विक स्तर के ब्रांड को पेश करते है, तो और उसके विज्ञापन में एक विदेशी मॉडल को दिखातें है तो उससे वाहन की वैल्यू और उसके स्तर में भी बढ़ोत्तरी होती हैं।


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