लागत खर्च कारों की कीमतों में बढ़ोत्तरी का बहाना तो नहीं ?

आईए हम इस बात पर चर्चा करते हैं। बजट 2011 में सभी कार कंपनियों सहित आम लोगों को भी कार की कीमतों में वृद्धि की उम्मीद थी। मगर बजट ने कार कंपनियों को अपने से दूर रखा और कारों की कीमतों में इजाफा नहीं हुआ। बजट 2011 के दौरान कार कंपनियों ने पहले से ही सोच रखा था कि उन्हें अपने कारों की कीमतों में वृद्धि करनी है अगर बजट में थोड़ा सा भी टेक्स बढ़ा तो, मगर जब ऐसा नहीं हुआ तो कंपनियों ने लागत खर्च को लेकर कीमत बढ़ाने की सोच ली और इसका बोझ ग्राहाकों पर लाद दिया। गौरतलब है कि
टाटा मोटर्स ने यात्री कारों के अलावा यूटिलिटी कारों की कीमतों में भी इजाफा करने की घोषणा कर दिया है। कंपनी द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि लागत कीमतों और खर्चों पर नियंत्रण करने के प्रयासों के बाद भी कंपनी गाडि़यों की कीमत को बढ़ाने का फैसला ले रही है। यात्री कारों के दाम अलग-अलग मॉडलों के आधार पर अलग-अलग बढ़ोतरी होगी।
इस क्रम में इंडिका के दाम 7,000 से 9,000 रुपए तक बढ़ा दिए गए हैं। इंडिगो सीएस की कीमतें 8,000 से 11,000 रुपए तक और मांज़ा की कीमतें 9,000 से 12,000 रुपए तक बढ़ा दी गईं हैं। वहीं टाटा सूमो की कीमतों में 13,000 रुपए से 15,000 रुपए तक इज़ाफा हुआ है। ग्रांड के दाम 16,000 से 19,000 रुपए तक बढ़ाई गई हैं। टाटा सफारी की कीमतें 18,000 रुपए से लेकर 29,000 रुपए तक बढ़ी हैं। आरिया की कीमतें 30,000 से 36,000 रुपए तक और वेंचर की 9,000 से 12,000 रुपए तक बढ़ा दी गई हैं।


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