पेट्रोल के उंचे दाम, कहीं ले न लें जान

सरकार देश भर में एक समयांतराल पर हर बार पेट्रोल की कीमतों में लगातार इजाफा कर रहा है, लेकिन सरकार इससे होने वाले नुकसान पर गौर नहीं कर रही हैं। सीएसई की एक्जक्यूटिव डायरेक्टर रिसर्च और प्रदूषण नियंत्रण टीम की हेड अनुमिता रॉय चौधरी का मानना है कि डीजल कारों के ज्यादा प्रयोग के कारण डीजल का ज्यादा से ज्यादा उपभोग होगा और इसका सीधा असर हमारे वातावरण पड़ेगा।
आपको बता दें कि डीजल सबसे प्रदूषित इंधंन के रूप में जाना जाता हैं। डीजल के जलने के बाद आस-पास के वातावरण में प्रदूषित कणों और ओजोन परत के भी प्रभावित होने का मौका होता हैं। आपको बता दें कि वर्तमान में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में डीजल कारों का दबदबा बढ़ता ही जा रहा हैं। यहि कारण है कि गत दिनों में भारतीय बाजार में कुल कारों की बिक्री में लगभग 36 प्रतिशत डीजल कारों की बिक्री दर्ज की गयी है, और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही यह आंकड़ा 50 प्रतिशत को भी छू लेगा।
जहां एक तरफ पेट्रोल की कीमत में इजाफा एक समस्या है, वही कार बाजार में डीजल हैचबैक कारों की मांग भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। आपको बता दें कि हाल ही में मारूति सुजुकी की स्विफट डीजल, शेवरले बीट डीजल, टोयोटा इटिओस लीवा डीजल, फोर्ड फिगो डीजल जैसी हैचबैक कारों की मांग में भी जबरजस्त तेजी आयी है, और आए दिन भारतीय सड़को पर डीजल कारों की संख्या बढ़ती ही जा रही हैं। यदि समय रहते सरकार पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर लगाम नहीं लगाती है, तो इसका भयंकर परिणाम झेलना पड़ सकता हैं।


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