मारूति में खत्म हो सकती है हड़ताल, अभी तक 400 करोड़ का झटका

संयत्र में धरने पर बैठे कर्मचारियों व प्रबंधन के बीच समक्षौता होने के आसार नजर आयें है। कंपनी हड़तालियों की एक अल्रग यूनियन के गठन की मांग को मानने के लिए तैयार हो चुकी है। हड़तालियों की मांग थी कि मनेसर संयत्र के लिए एक अलग यूनियन का गठन किया जाये। लेकिन इसके लिए कंपनी ने भी अपनी एक शतै रखी है कि यूनियन में किसी भी राजनितिक दल या व्यक्ति से कोई भी संबध नहीं होना चाहिए और यूनियन में केवल मनेसर के ही कर्मचारी सदस्य होंगे।
इसके अलांवा कर्मचारियों ने पूर्व में हड़ताल के दौरान बर्खास्त हुए 11 कर्मचारियों की बहाली की भी मांग की है। अभी इस मामले पर कंपनी विचार कर रही क्योंकि कंपनी ने बहाली के मुद्दे पर अपना विचार अभी साफ नहीं किया है। कंपनी ने नये यूनियन के संबध में बताया कि कंपनी मनेसर में भी एक यूनियन का गठन कर देगी लेकिन मनेसर व गुड़गांव दोनों ही संयत्रों के यूनियनों के प्रमुख सदस्य एक कांउसिल कमेटी बनांएगे और कर्मचारी व प्रबंधन के बीच मुख्य मामलों पर विचार करेंगे।
कंपनी ने मनेसर के लिए गठित यूनियन को पुरी स्वतंत्रता नहीं दी है कंपनी का कहना है कर्मचारियों की वेतन, प्रस्ताव या किसी सुझाव के लिए यूनियन को गुड़गांव संयत्र के यूनियन के साथ मिलकर ही कोई निर्णय लेना होगा। इसके अलांवा बर्खास्त हुए कर्मचारियों के बहाली के मामले में पर कंपनी के तेवर अभी भी रूखे ही है कंपनी का कहा है कि बर्खास्त कर्मचारियो को बहाल नहीं किया जायेगा।
पिछले दस दिनों से जारी इस हड़ताल में कंपनी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। कंपनी के दो हजार कर्मचारी हड़ताल पर है, और अब तक मारूति को 8,000 कारों के उत्पादन का नुकसान हो चुका है। इसके अलांव हड़ताल के कारण मारूति सुजुकी के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गयी है। कंपनी को अब तक लगभग 400 करोड़ रूपये का नुकसान हो चुका है।


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