मारूति के मनेसर संयंत्र में हड़ताल जारी, करोड़ो का नुकसान

कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा संयंत्र अभी भी हड़ताली कर्मचारियों की गिरफ्त में है। मनेसर संयंत्र में आज भी कोई उत्पादन नहीं हुआ। कंपनी में कामकाज बुरी तरह प्रभावित है न सिर्फ अपने कर्मचारियों की हड़ताल से बल्कि एसपीआईएल के इंजन और ट्रांसमिशन उपकरणों की आपूर्ति की कमी के कारण भी कारोबार प्रभावित हुआ है। एमएसआई का उत्पादन अब पूरी तरह ठप्प होने की दिशा में बढ़ रहा है। एसपीआईएल की हड़ताल के कारण कल-पूर्जो की आपूर्ति में कमी के कारण कल गुड़गांव में 2,800 कारों के औसत उत्पादन के मुकाबले 64 फीसद कम कारों का उत्पादन हुआ।
वहीं हरियाणा श्रम विभाग ने कर्मचारियों को एक अक्तूबर को हुए समझौते के संबंध में समझौता तोड़ने का नोटिस भेजा और उनसे अगले 48 घंटों में इस पर अमल करने को कहा। इधर, सभी बड़ी राष्ट्रीय टेड यूनियनों ने दलगत राजनीति से उपर उठकर- एटक, सीटू, एचएमएस, इंटक, बीएमएस, एआईयूटीयूयसी, टीयूसीसी, एआईसीसीटीयू और यूटीयूसी - ने कंपनी के प्रबंधन पर मनमानी करने उकसाने वाली चालें चलने का आरोप लगाते हुए उसकी आलोचना की और कहा कि अस्थाई कर्मचारियों को काम पर न आने देना सिर्फ बदले की कार्रवाई है।
मानेसर में इस साल जून से हो रही हड़ताल के कारण सरकार को करीब 350 करोड़ रुपए के उत्पाद शुल्क का नुकसान हुआ है जबकि खुद कंपनी को 1,540 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। कल तक उत्पादन में 51,375 कारों की कमी आई है। हड़ताल के कारण एमएसआई के विशिष्ट कल-पुर्जा आपूर्तिकर्ताओं को त्योहारी मौसम में भारी नुकसान होने का भय है और उन्होंने हरियाणा के मुख्य मंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से मामले को सुलझाने में हस्तक्षेप करने मांग की है।
आपको बता दें कि हुड्डा वर्तमान में अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ 13 अक्तूबर को हिसार में होने वाले उपचुनाव में व्यस्त हैं। एमएसआई मानेसर संयंत्र के कर्मचारी शुक्रवार अपराह्न कंपनी में रहते हुए स्टे इन हड़ताल पर चले गए जिससे संयंत्र में उत्पादन पूरी तरह से ठप्प हो गया। करीब 2,000 कर्मचारी हड़ताल पर हैं जिनमें नियमित, अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी और एपरेंटिस और प्रशिक्षु शामिल हैं।


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