परीक्षण पूरा, अब उड़ेगी मारुति 800

1980 में बनी भारत की पहली छोटी कार को पंख देने का काम कर दिखाया है एके विश्वनाथ ने। श्री विश्वनाथ ने कार की छत पर ब्रोटर ब्लेड और पहियों में विशेष यंत्र लगाकर इसे उड़ने वाली कार (फ्लाइंग कार) का रूप दे दिया है।
विश्वनाथ और उनकी कंपनी बी लोरियन को 16 वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद इस काम में सफलता हासिल हुई है। कंपनी ने एयरों शो में इसे प्रस्तुत किया था। इस मुश्किल और चुनौती भरे काम में कंपनी के कई काबिल और योग्य इंजीनियरों ने उनका साथ्ा दिया। उड़ने वाली कार की प्ररेणा के बारे में उनका कहना है कि कई चीजों से उन्हें यह आइडिया मिला जिसमें मक्खियों के उड़ने की क्षमता खास है।
उन्होंने बताया कि यह कार पहले जनरेटर से स्टार्ट किया जायेगा और फिर टेक ऑफ करने के बाद यह इंधन से चलेगी। उनका कहना है कि इस मामले में अभी कई कागजी औपचारिकताएं बाकी हैं। उसके बाद योजना को और आगे बढ़ाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कुछ मानकों पर खरा न
उतरने के कारण मारुति-800 का उत्पादन बंद किया जा चुका है। हम आपको एक बार फिर बता दें कि इस कार का मारुति कंपनी से कोई मतलब नहीं है।


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