कम प्रदुषण के चलते जल्द होगा हाइब्रिड कारों का बोलबाला
सरकार ने भी हाइब्रिड कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की नीति पर विचार कर रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार हाइब्रिड कारों के विनिर्माण पर उत्पाद शुल्क में रियायत दे सकती है। इस कार के उत्पाद को लेकर समिति बनाने के लिये मंत्रीमंडल की मंजूरी भी भारी उद्योग विभाग लेगा। सरकार द्वारा इन कारों को बढ़ावा देने के पीछे मुख्य कारण कम प्रदुषण और कम प्रेट्रोलियम उत्पादों का आयात है।
अगर पेट्रोलियम उत्पादों का आयात कम होगा तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी। वैसे तो वर्तमान में भी हाइब्रिड कारों का आयात किया जाता है मगर उसके दो काफी ज्यादा होते हैं। पेट्रोल या डीजल कारों के मुकाबले कम से कम 25 प्रतिशत महंगे पड़ते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है हाइब्रिड ? हाइब्रिड एक जटिल तकनीक है।
इससे लैस कार जरुरत के मुताबिक पेट्रोल और बैटरी दोनों मोड पर चल सकती है। उदाहरण्ा के तौर पर अगर कार कम स्पीड से चल रही है तो वह बिजली से चलती रहेगी और अगर आप कार को हाई स्पीड में करना चाहते हैं तो आप कार को पेट्रोल मोड पर कर सकते हैं अन्यथा यह खुद ब खुद पेट्रोल मोड पर आ जाती है। इन कारों में पेट्रोल के साथ ही साथ इलेक्ट्रिक इंजन लगे होते हैं।
यह कारे तकनीक रूप से काफी बेहतर होती हैं इसलिये अभी यह काफी महंगी भी हैं। बताते चलें कि इण्डिया अभी हाइब्रिड कार नहीं बनाती। भारत में मिलने वाली हाइब्रिड कार पूरी तरह से इंपोर्ट की जाती हैं ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी के चलते कारें अन्य कारों की तुलना में काफी महंगी हो जाती है। भारत में मिलने वाली हाइब्रिड कार में टोयोटा प्रयास इकलौती है।
टोयोटा की इस गाड़ी की कीमत 28 से 30 लाख रुपये है। मगर अब इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कुछ और हाइब्रिड कारें भारतीय सड़कों पर जल्द ही देखी जा सकती है। जल्द आने वाली कारों में मारुति सुजुकी एसएक्स 4 और शेवरले वोल्ट है।


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