25 साल बाद अमेरिका को हरा देगीं भारतीय कारें

ऐसा माना जा रहा है कि वर्ष 2020 तक प्रतिवर्ष मात्रा 5000000 इकाइयों जो अभी भी 6 लाख तक बढ़ सकती है के साथ डबल हो जाएगा। यह आंकड़ा भारत को यूरोपीय कार बाजार में सबसे आगे ला सकता है जहां अभी जर्मनी है। बीते दशक का मध्य समय इस बात का गवाह है कि जिस तरह भारत खुद को ऑटो हब की श्रेणी में सबसे आगे रखने के लिये उत्पादन पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है उससे जल्द ही वह अमेरिका पर हावी हो जायेगा।
दूसरे दशक में भारत अमेरिका को बिक्री राजस्व की मात्रा में 200 अरब डालर नीचे गिरा सकता है। एक विश्लेषिक फर्म ने कहा कि भारत की यह पारी समृद्धि के हिसाब से सबसे बड़ी पारी होगी। इस प्रक्रिया में भारत को वाहन के निर्माण और कारों के लिये वस्तुओं की आपूर्ति के लिये 35 अरब डालर निवेश करना पड़ सकता है। अध्यन के अनुसार कोरियाई और जापानी बाजारों में अन्य निर्माताओं से अधिक की आवश्यक्ता नहीं होगी। अध्यन के अनुसार 2020 तक ऐशियाई क्षेत्रों के योगदान से वैश्विक ऑटो बाजार की मात्रा 205000000 से 65% के लिए प्रतिवर्ष हो जाएगा।


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