सेकेंड हैंड वाहन लेने से पहले जरूरी सलाह

By अंकुर कुमार श्रीवास्‍तव

Cars
लखनऊ के हजरतगंज निवासी अरविंद सिंह ने हाल ही में एक सेकेंड हैंड मोटरसाइकिल खरीदी। बड़ी शान से वे इसकी सवारी करने लगे, लेकिन अचानक रात के करीब 11 बजे उनके घर पर पुलिस ने दस्‍तक दी। पुलिस ने उन्‍हें गाड़ी का नंबर दिखाया और मालिक का नाम पूछा। श्री सिंह ने जब यह कहा कि वही बाइक के मालिक हैं, तो पुलिस ने तुरंत उनसे थाने चलने को कहा। पुलिस ने उनसे बताया कि उसी बाइक से हाल ही में चेन स्‍नैचिंग हुई है। लंबी वार्ता के बाद जब यह पक्‍का हो गया कि श्री सिंह ने वारदात के बाद बाइक खरीदी है, पुलिस ने उन्‍हें छोड़ दिया।

अगर आप सेकेंड हैंड कार या बाइक खरीदने जा रहे हैं, तो क्‍या आप पसंद करेंगे कि आपके घर भी पुलिस दस्‍तक दे। शायद नहीं! इसी समस्‍या का हल आपको नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) बताएगा। जिसके अंतर्गत महज एक क्लिक से आप उस वाहन के बारे में पता लगा सकेंगे, जिसे आप खरीदने जा रहे हैं।

जैसे जैसे लोगों की आय बढ़ती है तो कार खरीदने का क्रेज भी बढ़ने लगता है। ऐसे में हमेशा संभव नहीं कि आप नया कार ही ले सकें क्‍योंकि एक बड़ा वर्ग उन लोगों का भी है जो सेकेण्‍ड हैण्‍ड वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। चाहें वह मोटरसाइकिल हों या फिर कार। उनका
मानना है कि शो रूम से बाहर निकलते ही नये कार की कीमतों में गिरावट आ जाती है, वहीं पुराने वाहन को कुछ दिन तक चलाने के बाद उसे दुबारा उतने ही दाम में बेंचा जा सकता है।

अब यहां सवाल यह पैदा होता है कि कार पंसद और मूल्‍य निर्धारण के बाद भी आपके मन में एक शंका बनी रहती है कि कहीं वह वाहन चोरी का न हो या फिर उसका इस्‍तमाल किसी अपराध में न किया गया हो। इससे छुटकार दिलाने के लिये राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने अपनी वेबसाइट पर चोरी, लूटपाट के या आपराधिक वारदातों में इस्तेमाल हुए वाहनों का पूरा ब्यौरा देना शुरू कर दिया है।

ब्यूरो की वेबसाइट (एनसीआरबी.एनआइसी.इन) खोलने पर उसमें पुराने वाहन संबंधित लिंक पर क्लिक करते ही वाहन का सारा विवरण सामने आ जाता है। इसके लिए आपको दिए गए आप्शन में वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर और इंजन नंबर फीड करना होता है। अगर वाहन का कोई आपराधिक रिकार्ड है तो उससे संबंधित सारी जानकारी आपके सामने आ जाएगी। एनसीआरबी द्वारा लगातार इस वेबसाइट को अपडेट भी किया जाता है। लोगों को होगी सहूलियत एनसीआरबी की वेबसाइट से वाहन के संबंध में जानकारी लेने की सुविधा बढ़ी है। अब वाहन का रिकार्ड वेबसाइट पर डालकर उसके आपराधिक इतिहास के बारे में आसानी से जानकारी की जा सकती है। इससे चोरी या लूटपाट के वाहनों की खरीद फरोख्त से बचा जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ दिल्‍ली में लागातार वाहन चोरी की वारदातों में हो रहे इजाफे के चलते दिल्‍ली पुलिस ने एसएमएस सर्विस शुरु की है।

इस सर्विस के अन्‍तर्गत दिये हुए नम्‍बर (9811599901) पर एसवी स्‍पेस रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर या इंजन नम्‍बर लिख कर भेजना होगा और आपके पास वाहन से संबंधित सभी चीजें सामने आ जायेगी। मगर यह सुबिधा अभी सिर्फ दिल्‍ली वासियों के लिये है।

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Article Published On: Monday, February 14, 2011, 14:18 [IST]
English summary
If you are going to buy second hand vehicle then you have to check whether the vehicle had involved in any crime or not. Now your this problem will solve by National Crime Records Bureau (NCRB). NCRB has launched a website which will has such updates.
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