बजट के बाद बढ़ जाएगें डीजल कारों के दाम

देश में डीजल कारों की लगातार बढ़ती तादादों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ पेट्रालियम मंत्रालय है जो अपने सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से डीजल पर सब्सिडी देने को बाध्य है तो दूसरी ओर पर्यावरण मंत्रालय है जो इसे दुश्मन मानता है। इसके बाद है किरीट पारीख कमिटी की रिपोर्ट जिसमें डीजल कारों पर अलग से टैक्स लगाने की सिफारिश की है।
कमिटी की सिफारिश है कि 80,000 रुपए तक का अतिरिक्त टैक्स डीजल कारों पर लगाया जाए। इन सबसे एक बात तो साफ जाहिर है कि कार की बिक्री अगर तेजी पकड़ रही है तो सरकार उसपर टैक्स लगाएगी ही। खास बात तो यह है कि बेहद लग्जरी और महंगी कारें भी डभ्जल इंजन की होने लगी हैं। अब इस टेक्स वृद्धि की चिंता कार कंपनियों को सता रही है। बड़ी कार कंपनिया बडे स्तर पर डीजल गोडियों को लेकर भारत में निवेश कर रही हैं।
कंपनियां एक के बाद एक डीजल कारों की नई मॉडल को मार्केट में पेश कर रही है तथा अपने प्लांट का विस्तार भी करती जा रही हैं। उदाहरण के तौर पर फोर्ड इंडिया ने भारत में अपने नये प्लांट पर 50 करोड़ डालर का निवेश किया है। अब कंपनी को यह डर सता रही है कि कहीं सरकार डीजल कारों पर टैक्स न बढ़ा दे। इससे उसकी भविष्य की योजनाओं को धक्का लग सकता है। मारुति भी अपनी लोकप्रिय कारों के डीजल संस्करण पेश करती जा रही है। इन सबको अब डीजल कारों पर संभावित टैक्स की चिंता सता रही है।


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