डीजल कारें खतरे की घंटी

डीजल कारों की बढ़ती मांग से कार कंपनियां नित नये डीजल संस्करण बाजार में उतार रही हैं। हालांकि, पर्यावरणविदों की चिंता कुछ और है। उनका कहना है कि इससे डीजल की खपत बढ़ने के साथ साथ प्रदूषण का खतरा भी बढ़ रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की निदेशक सुनीता नारायण का मानना है कि डीजल गाडि़यों की बढ़ती बिक्री से वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ेगा।
डीजल खपत बढ़ने से तेल कंपनियों का सब्सिडी बोझ भी बढ़ रहा है। दरअसल, कृषि, सार्वजनिक परिवहन और माल परिवहन में डीजल का इस्तेमाल होने की वजह से इस पर भारी सब्सिडी वहन करती है। लेकिन, आंकड़े बताते हैं कि कृषि क्षेत्रा में डीजल का इस्तेमाल घटकर मात्रा 12 प्रतिशत ही इस्तेमाल होता है। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश डीजल कारों की कड़ी आलोचना कर चुके हैं।
पर्यावरण मंत्री रहते हुये रमेश ने खासकर डीजल की भारी खपत करने वाले एसयूवी जैसे लक्जरी वाहनों का विरोध किया था और कहा था कि ऐसे वाहन मालिकों से डीजल का बाजार मूल्य वसूला जाना चाहिए। पेटोलियम मंत्रालय भी डीजल की लक्जरी कारों पर अतिरिक्त शुल्क लगाये जाने के पक्ष में है। पेटोलियम मंत्रालय इस संबंध में वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर ऐसे वाहनों पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने का सुझाव भी दे चुका है।
उपलब्ध आंकडों के अनुसार जिन क्षेत्रों की वजह से डीजल के दाम सस्ते रखे गये हैं उनमें इसका प्रयोग कम ही होता है। डीजल की कुल खपत में टक जैसे वाहनों में 37 प्रतिशत और सार्वजनिक परिवहन में महज़ 12 प्रतिशत ही डीजल का उपभोग होता है। सेंटर फार एनवायरमेंट का सवाल है कि आखिर क्यों सरकारी नीतियों के कारण इस तरह के प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है। सोसाइटी फॉर इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (सियाम) के आकंड़ों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में डीजल गाडि़यों की बिक्री में इजाफा हुआ है। डीजल की कुल खपत में डीजल कारों में 15 प्रतिशत खपत हो रही है। वहीं पांच साल पहले यह आंकड़ा 11 प्रतिशत ही था।
जिस तरह से भारतीय बाजार में डीजल कारों की मांग बढ़ रही है उसे देखकर पर्यावरणविद काफी चिंतित है। उनका मानना है कि यदि समय रहतें डीजल कारों का प्रयोग कम नहीं किया गया तो इससे पर्यावरण को खासा नुकसान हो सकता है। क्योंकि डीजल के प्रयोग से वातावरण में कार्बन की मात्रा ज्यादा हो जाती है। आपको बता दें कि डीजल कारों की मांग में आइ तेजी का मुख्य कारण पेट्रोल की कीमतों में आया उछाल है अब देखना यह है कि सरकार इस मामले पर कब गौर करती है।


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