कार कं‍पनियों के सामने चुनौती, बढ़ सकती हैं कीमतें

Car industry
कच्चे माल की बढ़ती लागत से पहले से परेशान कार बनाने वाली घरेलू कंपनियों को अब प्रमुख उपकरणों की कमी समेत अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे इस साल उनके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। कच्चे माल की बढ़ती लागत को तो वे ग्राहकों पर टाल सकते हैं लेकिन कंपनियों को उपकरणों की कमी से जूझना पड़ रहा है जो उनके लिये बड़ी समस्या है। खासकर 11 मार्च को जापान में आये भूकंप और सुनामी के बाद से यह समस्या और गंभीर हो गयी है। पुन: रिजर्व बैंक द्वारा हाल में प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि से भी कंपनियां परेशान हैं। नीतिगत दरों में वृद्धि से वाहनों के लिये लोन महंगा हो सकता है।

जनरल मोटर्स इंडिया के उपाध्यक्ष पी बालेन्द्रन ने कहा, निश्चित रूप से उद्योग के समक्ष समस्याएं है लेकिन हमें लगता है यह कुछ दिनों की समस्या है। आने वाला दिन बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि उपकरणों की कमी से उद्योग के समक्ष समस्या बढ़ी है। खासकर जापान में भूकंप और सुनामी के बाद से स्थिति और बिगड़ी है क्योंकि बड़े पैमाने पर उपकरण वहीं से आते हैं। इससे कार कंपनियों के लिये बिक्री लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। बालेन्द्रन ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में वृद्धि से वाहन लोन बढ़ने की संभावना है। इससे कार खरीदने वाले अपनी योजना कुछ समय के लिये टाल सकते हैं।

महिंद्रा एंड महिंद्रा का भी मानना है कि जापान संकट और रिजर्व बैंक की अल्पकालिक दरों में वृद्धि का उद्योग पर अल्पकालिक असर पड़ेगा। महिंद्रा एंड महिंद्रा के अध्यक्ष (वाहन) पवन गोयनका ने कहा, पिछले कछ समय से कच्चे माल की लागत बढ़ी है। अब जापान संकट और रिजर्व बैंक की नीतिगत दरों में वृद्धि से उद्योग की समस्या और बढ़ गयी है। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो और रिवर्स रेपो में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे लोन महंगा हो सकता है। होंडा सिएल कार्स इंडिया और टाटा मोटर्स कच्चे माल की बढ़ती लागत को कम करने के लिये पहले ही एक अप्रैल से कीमत बढ़ाने का संकेत दे चुकी है।

कुछ और कंपनियां इस प्रकार का कदम उठा सकती हैं। अतुल आटो के निदेशक विजय केडिया ने कहा कि जापान से कुछ उपकरणों का आयात अल्पकाल में प्रभावित होगा। उद्योग के लिये कच्चे माल की बढ़ती लागत के साथ बढ़ती मांग को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। दरों में वद्धि पर उन्होंने कहा कि आने वाले सप्ताह में इससे मांग पर असर पड़ सकता है। फोर्ड इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक माइकस बानेहाम ने भी कहा कि उद्योग के समक्ष चुनौती है। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि उद्योग इससे जल्दी ही पार पा लेगा।

Article Published On: Thursday, March 24, 2011, 14:57 [IST]
English summary
Faced with surging raw material costs, Indian car-makers now face many serious challenges including a shortage of key components, which could impact their performance this year.
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