रात में सड़क हादसो को रोकेगी एंटी ग्लेयर तकनीक

यह तकनीक अन्तर्राष्ट्रीय वाहन प्रौधोगिकी केन्द्र (आइसीएटी ) के द्वारा विकसित की गयी है। सरकार की योजना है कि वो सभी वाहन कम्पनियों से आग्रह करेगी कि वो अपने वाहनों में इस तकनीक का इस्तेमाल करे। भारी उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव अंबुज शर्मा ने बताया कि यदि वाहन कम्पनियां इस तकनीक के प्रयोग में लापरवाही बरतेगी तो इसे अनिवार्य करने के लिए कानून बनाये जाने की भी योजना बनायी जा रही है।
स्वास्थ संगठन के आंकडो की तरफ अगर नजर करे तो वर्ष 2009 के दौरान सडक दुर्घटनाओं में 1.17 लाख्ा मौतें हुयी जिनमें से लगभग 70 फिसदी मौतें रात के समय हुयी दुर्घटनाओं में हुयी थी। इसी आंकडो में कमी करने के लिए एंटी ग्लेयर तकनीक को विकसित किया गया है। इस तकनीक को बनाने में लगभग 4 करोड़ रूपये का खर्च आया है। बकौल शर्मा यह तकनीक पिछले साल अप्रैल माह से शुरू की गयी है और इसकी अवधि दो साल तक है।
एंटी ग्लेयर तकनीक में दो अलग अलग किस्म की फिल्मों का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक में एक फिल्म वाहन के विंडस्क्रीन और दूसरी ओर हेड लैम्प पर लगायी जाती है। इस तरह से वाहन चालक जब रात में गाडी चलाता है तो सामने से आ रही वाहन की रौशनी सामने पडने पर चालक की आंखों पर नही पडती और चालक आसानी से वाहन चलाता है। एंटी ग्लेयर तकनीक पर वर्तमान में लगभग 2000 रूपये का खर्च है लेकिन आगे चलकर यह और सस्ती हो जायेगी और इसकी किमत 500 रूपये तक हो सकती है।


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