अब पानी से चलेगी कार

यह उपकरण संबंधित वाहन के इंजन के पास फिट किया जाता है। इंजन चालू होने पर उपकरण अपना काम शुरू करता है। इंजन बंद होने पर यह स्वत: बंद हो जाता है। पिछले पांच सालों से इस पर काम करने का दावा करने वाले गुप्ता के अनुसार उन्होंने यह प्रयोग फोर स्टोक कायनेटिक नोवा के अलावा मारूति एवं डीजल की इंडिका कार आदि पर किया है, जो पूरी तरह सफल रहा है।
उन्होंने बताया कि इस प्रयोग में वाहन में पानी का उपकरण अलग से लगाया जाता है। साथ ही पेट्रोल की लाइन के बराबर से पानी की लाइन वाहन के कार्बोरेटर में दी जाती है। इसके लिए वाहन में अधिक स्थान की जरूरत नहीं पड़ती है। इसको किसी भी पेट्रोल और डीजल चालित वाहन में आसानी से फिट किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में मैकेनिक पद पर तैनात गुप्ता ने बताया कि पानी के इस उपकरण की एक खास बात यह भी है कि इससे वाहन के इंजन पर किसी तरह का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
यही नहीं इससे 60 से 70 फीसदी प्रदूषण कम किया जा सकता है। इसके प्रयोग से वाहन का इंजन ठंडा रहता है। इंजन में कार्बन नहीं बनता जिससे इंजन की लाइफ बढ़ती है। उन्होंने बताया कि इस उपकरण को लगवाने में दो पहिया वाहन पर छह और चार पहिया वाहन पर करीब पन्द्रह हजार रूपये का खर्चा आता है । इसका पेटेंट कराया जा चुका है।


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