तेजी से बढ़ेगी इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड

टेक्निकल एक्जिक्यूटिव ऑफ आईडी द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक वाहन बनाने वाली 250 कंपनियों ने अभी भी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन बनाने नहीं शुरू किए हैं। फिर भी अनुमान है कि इस साल के अंत तक 7 लाख इलेक्ट्रिक वाहन सड़क पर उतरेंगे।
पेट्रोल और डीजल की लगातार कमी के चलते लोग इनके विकल्प खोजने में जुटे हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं मिला है। जाहिर है इन दोनों ईंधन के बाद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री सिर्फ इलेक्ट्रिक करंट का सहारा ले सकती है। टेक्निकल एक्जिक्यूटिव ऑफ आईडी द्वारा हाल ही में जारी हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक वाहन बनाने वाली 250 कंपनियों ने अभी भी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन बनाने नहीं शुरू किए हैं। फिर भी अनुमान है कि इस साल के अंत तक 7 लाख इलेक्ट्रिक वाहन सड़क पर उतरेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में छोटीं कंपनियां कुछ दिन तक बाजार में रहने के बाद अपने प्लांट बड़ी कंपनियों को सौंप कर चल देती हैं, यही कारण है कि इसके बाजार में स्थिरता नहीं आ रही है। हां कई कंपनियां ऐसी भी हैं, जो वैश्विक स्तर तक पहुंची और अपनी पहचान बनाई। कई कंपनियां विभिन्न ब्रांड के नाम पर वाहन बना रही हैं।
अगले पांच सालों का अनुमान है कि पेट्रोल-डीजल कारों के मुकाबले इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड तेजी से बढ़ेगी। उच्च वर्ग के लोगों के बीच भले ही इसकी मांग थोड़ी कम हो, लेकिन मध्यमवर्गीय लोगों में डिमांड ज्यादा होगी। नई कारों की खासियत यह होगी कि ये लेड एसिड बैटरी की जगह लीथियम बैटरी पर चलेंगी और लीथियम बैटरी से चलने वाली कारों का बढ़चढ़ कर स्वागत होगा। इसे लेकर आप लॉन्ग ड्राइव पर आसानी से जा सकेंगे।
शोधकर्ता और बड़ी-बड़ी कंपनियां भी इसे गंभीरता से ले रही हैं, यह देखने को मिला 'इलेक्ट्रिक वेहीकल्स 2010-2020' की कॉन्फ्रेंस में। कॉन्फ्रेंस में भारत, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और यूके जैसे बड़े देश शामिल हुए और सभी ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का समर्थन किया।


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