टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी रिव्यू - नहीं करना होगा कोई समझौता, लगेगी बिल्कुल पेट्रोल कार
भारतीय बाजार में सीएनजी कारों के साथ लगातार कॉम्प्रोमाइज करके चलना ही पड़ता है, चाहे ज्यादा हो कम लेकिन कुछ न कुछ अधूरा लगता ही है।
ग्राहकों को हमेशा पॉवर या माइलेज, बूट स्पेस या अधिक सीएनजी आदि के बीच चुनाव करना पड़ता है, इसके साथ ही उन्हें यात्री सीट के पीछे मीथेन से भरी सिलेंडर होने की भी चिंता लगातार बनी रहती है।

यह सब चीजें ऐसी थी जिन्हें भारतीय ग्राहकों ने स्वीकार कर लिया था। लेकिन यह सिर्फ तब तक, जब तक टाटा मोटर्स ने ऑटो एक्सपो 2023 में अपना नया दो सिलेंडर तकनीक नहीं दिखाया था।
क्या टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी भारत में सीएनजी मॉडल्स की शुरुआत है या फिर यह भी वैसी पारंपरिक सीएनजी वाहन है?
हाल ही में हमनें टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी को गोवा में चलाया ताकि यह जान सके कि सीएनजी लगाने के बाद इस प्रीमियम हैचबैक में कितना बदलाव आया है।

टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी - क्या यह सच में प्रैक्टिकल?
टाटा अल्ट्रोज वर्तमान में सबसे अच्छी दिखने वाली हैचबैक में से एक है और इसके सीएनजी वर्जन में लुक के अनुसार कोई बड़े बदलाव नहीं किये गये हैं, सिर्फ इसके टेलगेट पर आईसीएनजी का बैज जोड़ा गया है।
इसके इंटीरियर में भी बहुत कम बदलाव किये गये हैं, यहां सेंट्रल कंसोल में सिर्फ नया सीएनजी बटन जोड़ा गया है जो आपको बताता है कि आप कौन से फ्यूल का उपयोग कर रहे हैं। भारत के किसी सीएनजी हैचबैक में पहले बार वौइस् एक्टिवेटेड सिंगल-पेन रूफ दिया गया है।

इसके अलावा, टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी उन सभी चीजों के साथ आता है जो इसके पेट्रोल वर्जन में दिए गये हैं। टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी के टॉप वर्जन में ऑटोमेटिक हेडलाइट व रेन सेंसिंग वाइपर्स, एक 7-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, टाटा आईआरए स्मार्टकार सेटअप के साथ तथा एंड्राइड ऑटो व एप्पल कारप्ले सपोर्ट दिया गया है।
टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी के टॉप वर्जन में वायरलेस फोन चार्जर, एयर प्योरीफायर, लेदर सीट अपहोल्स्ट्री व डुअल टोन अलॉय व्हील्स दिए गये हैं।

डिजाईन व प्रैक्टिकल टर्म में डिजाईन में सबसे बड़ा बदलाव तब देखनें को मिलता है जब आप टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी का टेलगेट खोलते हैं। यहां टाटा के दो 30 किलोग्राम सीएनजी सिलेंडर को बूट के फ्लोर पर रखा गया है।
जी हां! टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी में 210 लीटर का बूट इसके पेट्रोल वर्जन के 345-लीटर बूट स्पेस से कम है। हालांकि, अआप शिकायत करने लग जाए उससे पहले ही बता दूं कि रेग्युलर 60 किलोग्राम कंप्रेस्ड सीएनजी टैंक के साथ कोई बूट स्पेस ना होने से अच्छा है कि 210 लीटर का बूट स्पेस मिल रहा है।

भले ही सीएनजी टैंक्स ने अंडरफ्लोर स्टोरेज एरिया ले लिया हो और 135 लीटर तक कम कर दिया हो लेकिन टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी का 210-लीटर बूट स्पेस आपके शॉपिंग के सामान को रखने के लिए पर्याप्त है।
टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी - कैसा है इंजन और कितनी सुरक्षित है यह कार?
टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी कंपनी के 1.2-लीटर नेचुरली एस्पिरेटेड 3-सिलेंडर रेवोट्रन इंजन दिया गया है, जो कि पेट्रोल के साथ 87 बीएचपी का पॉवर व 115 न्यूटन मीटर का टार्क प्रदान करती है।

लेकिन जब इसमें मीथेन का संचार होता है तो यह 87 बीएचपी का पॉवर 72।4 बीएचपी, वहीं टार्क 12 न्यूटन मीटर कम होकर 103 न्यूटन मीटर हो जाता है। पॉवर 5-स्पीड मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ सामने के पहियों में भेजा जाता है।
दोनों भी फ्यूल में से किसी एक के भी कम होने पर इंजन बंद ना हो जाए इसके लिए स्मार्ट ईसीयू दिया गया है जो पेट्रोल व सीएनजी के बीच आसान से ऑटोमेटिकली शिफ्ट हो जाता है।

नया ईसीयू अच्छे माइलेज देने के साथ दोनों फ्यूल के बीच आसानी से स्विच कर लेता है। नया ईसीयू अल्ट्रोज को सीएनजी मोड में शुरू होने की अनुमति भी देता है।
इसके टैंक को भरना भी एक आसान काम है क्योकि इसके लिए अल्ट्रोज में एक अलग से नोजल दिया गया है। इसमें एक छोटा सा माइक्रो स्विच दिया गया है जब वह डिटेक्ट करता है कि फ्यूल फिलर कैप ओपने है तो वह इंजन में फ्यूल भेजना बंद कर देता है।
अन्य सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो कई एयरबैग, ईबीडी के साथ एबीएस, ब्रेक स्वे कंट्रोल तथा कॉर्नर स्टेबिलिटी कंट्रोल आदि कई सिस्टम दिए गये है जो यात्रियों की सुरक्षा करते हैं।

टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी - क्या ड्राइव भी हुई है प्रभावित?
एक छोटा और अधिकतर टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी मालिक कहेंगे - नहीं। जब तक आप इस प्रीमियम हैचबैक को अपनी लिमिट तक पुश नहीं करेंगे तब तक आपको इसके पॉवर में हुई कमी का पता नहीं चलेगा।
पेट्रोल व सीएनजी मोड में पेपर में दिखने वाले बहुत बड़े बदलाव के बावजूद, यह हैचबैक शहर में पर्याप्त प्रदर्शन प्रदान करता है।
अगर आप सीएनजी में चलते हुए दूसरे गियर से अधिक पर आप रेव रेंज में खुद को पाते हैं और अगर आपको पॉवरबैंड में आपको तुरंत वापस आना है तो हमारी सलाह हो कि आप गियर कम कर ले।

पेट्रोल व सीएनजी मोड में स्विचिंग अपने आप हो जाती है जब फ्यूल स्तर कम हो। हालांकि, ड्राइवर्स डैशबोर्ड में दिए गये सीएनजी बटन को दबाकर ही मोड्स के बीच स्विच कर सकता है। नई टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी, सीएनजी मोड में ही यात्रा शुरू कर सकती है जो कि इसके प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले के बड़ा प्लस पॉइंट है।
अल्ट्रोज पेट्रोल वर्जन के मुकाबले आईसीएनजी में सस्पेंसन सेटअप को कड़ा किया गया है, खासकर दो सिलेंडर के वजन को हैंडल करने के लिए पीछे में अधिक कड़ा किया गया है। यह इस बात को सुनिश्चित करता है कि अधिक वजन की वजह से टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी बम्पस से गुजरते हुए नीचे ना बैठ जाए जो कि आपके पीठ के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।

इसका स्टीयरिंग पेट्रोल मॉडल जैसा ही रखा गया है और यह पर्याप्त फीडबैक प्रदान करता है। अधिक स्पीड पर व्हील का वजन बढ़ जाता है जो कि ड्राईवर में अधिक आत्मविश्वास पैदा करता है।
टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी के सामने व पीछे दिए गये डिस्क ब्रेक पर्याप्त है। हालांकि, क्लच के पास होने की वजह से ब्रेक पैडल का उपयोग करना थोड़ा अजीब सा हो सकता है।

अधिकतर समय केबिन के भीतर एनवीएच लेवल मैनज करने लायक होता है। परेशानी तभी आती है जब इंजन तेजी से भागता है।
टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी पर ड्राइवस्पार्क के विचार
टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी में यह तकनीक लायी गयी है कि आपको बार-बार सीएनजी में स्विच करने से बचाता है। इसका दो सिलेंडर सेटअप यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक बूट का उपयोग कर पायें, ऑनबोर्ड सेफ्टी सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि आप बिना टेंशन के कंप्रेस्ड मीथेन के साथ चल सके।

टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी का शहर में प्रदर्शन पेट्रोल मॉडल जैसा ही है और आपको पेट्रोल पॉवर इंजन की जरूरत सिर्फ हाईवे पर ही महसूस होती है।
कुल मिलाकर, हमारे द्वारा चलाई कारों में टाटा अल्ट्रोज आईसीएनजी सबसे कम कॉम्प्रोमाइजड कारों में से एक है और यहीं इस कार को एक आकर्षक विकल्प बनाती है।
इसकी कीमत 7.55 लाख रुपये से शुरू होती है।


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