महिन्द्रा e2o प्रीमियम टेस्ट ड्राइव रिव्यू
इलेक्ट्रिक वाहन अमेरिका, जापान, पश्चिमी यूरोप और चीन जैसे देशों में रफ्तार पकड़ रहे हैं। जापान और अमेरिका इस दौड़ में सबसे आगे हैं जहाँ ये इलेक्ट्रिक वाहन कुल कारों की बिक्री का क्रमशः 28 तथा 26 प्रतिशत हैं। दुनिया की सबसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक कार निसान लीफ सहित इन बाजारों में लगभग 25 इलेक्ट्रिक मॉडल बिक्री के लिये उपलब्ध हैं।
हलाँकि भारत में स्थितियाँ कुछ अलग हैं। इलेक्ट्रिक कारों में उपभोक्ताओं के लिये ज्यादा विकल्प नहीं हैं – रेवा को 2001 में तत्कालीन रेवा इलेक्ट्रिक कार कम्पनी द्वारा उतारा गया था, जिसे पिछले वर्ष महिन्द्रा e2o से बदला गया। इन कारों का मँहगा होना, चार्ज करने के आधारभूत ढाँचे तथा सरकार की ओर से दी जाने वाली ग्राहक सम्बन्धी रियायतों में कमी के कारण इलेक्ट्रिक कारों को अब तक भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा स्वीकारा नहीं गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों का शून्य प्रदूषण की सोच भारत के लिये बेमानी है क्योंकि भारत की 90 प्रतिशत बिजली कोयले और पेट्रोलियम जैसे पारम्परिक ऊर्जा स्रोतो से बनती है।
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इसलिये जब हमसे महिन्द्रा e2o, प्रीमियम e2o, को चलाकर देखने के लिये कहा गया तो ऑफिस में काफी संशय की स्थिति थी कि नई कार पुरानी कार की तुलना में बेहतर है कि नहीं और अगर है भी तो लम्बे समय में पारम्परिक पेट्रोल और डीजल कारों की अपेक्षा एक किफायती विकल्प साबित होगी। तो क्या नई महिन्द्रा e2o भविष्य के यातायात का साधन बन पायेगी? आइये देखते हैं।
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स्टाइलिंग
सबसे बढ़िया डिज़ाइन - लेकिन हम आश्वस्त नहीं हैं। क्योंकि कई कारें रबड़ वाली बतख जैसी लगती हैं। और हमारी टेस्ट कार के चमकीली पीली होने के कारण यह तुलना स्वाभाविक थी। ग्रिल में काफी जगह बतख की चोंच की तरह, बगल के फूले हुये एबीएस पैनल पंखों के समान और पिछला भाग मोटी बतख के पिछले हिस्से के समान दिखती है। आपको ऐसा लगेगा कि यह अभी उठ कर बतख की भाँति चल पड़ेगी।

ऐसा केवल हम ही कह रहे हैं क्योंकि इसके विपरीत कई लोग e2o को एक आकर्षक छोटी कार के रूप में देखते हैं। जो कि काफी हद तक सही भी लगता है क्योकि यह समान्य कारों की भीड़ से अलग दिखती है। लेकिन हमें यह नहीं पता कि कितने लोग इस आकर्षक बतख को आजमाना चाहेगें....

ड्राइव
हलाँकि यह बतख जैसी दिखती है लेकिन क्या ये चलती अच्छी है। हमें यह कहना पड़ रहा है कि इसे चलाना काफी मजेदार है, इसके लुढ़कने की प्रवृति को छोड़कर जो कि इसके मुलायम सस्पेन्शन के साथ-साथ अनावश्यक ऊँचाई के कारण है। इसका सस्पेंशन ऊबड़-खाबड़ सतहों पर भी झटकों से बचाता है। कार ड्राइव सिलेक्टर को 'एफ' या 'फॉर्वर्ड' कर देने पर पर्याप्त तीव्रता से आगे बढ़ती है जो कि शहर के ट्रैफिक से जूझने के लिये पर्याप्त है।

लेकिन इसके साथ ही e2o में एक 'बी' या 'बूस्ट' मोड भी है जिसके कारण तेजी से स्पीड बढ़ाना आसान होता है और यह ओवरटेक करने या खड़े वाहने को तेजी से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ने में आश्चर्य रूप से मददगार है। बूस्ट हर समय कार की ऊर्जा का रहस्य नहीं हो सकता, हलाँकि इसका 60 से 70 किमी प्रतिघण्टे की रफ्तार से लगातार प्रयोग करने पर इसकी 48 वाल्ट लिथियम आयन बैटरी की रेंज समान्य की अपेक्षा तेजी से गिरती है।

ड्राइव सिलेक्टर का अन्दर से प्राकशित न होने के कारण, अगर आप नये e2o चालक हैं तो रात में यह जान पाना कि आपने कौन सा मोड चुना है, काफी कष्टकारी होता है। स्टियरिंग का हल्का होना आवश्यक है, हलाँकि e2o प्रीमियम में इलेक्ट्रिक पॉवर स्टियरिंग सहायक है, लेकिन हमारी टेस्ट कार का स्टियरिंग बैंगलोर के रूकते-चलते ट्रैफिक तथा पार्किंग में काफी भारी लगा। इस मामले को सुलझाना आवश्यक है क्योंकि इस कार को महिला चालकों को आकर्षित करने के लिये भी बनाया गया है। अन्त में e2o के ब्रेक का स्पंजी तथा एक नई जगह होना सामान्य कारों की तुलना में काफी अजीब है और इसके कारण वाहन के प्रति आत्मविश्वास में कमी हो जाती है।

केबिन
कार में अन्दरूनी तौर पर काफी जगह है और इसका ऊँचा होना यहीं पर काम आता है। काफी ज्यादा हेडरूम के साथ-साथ सीट भी पर्याप्त रूप से आरामदायक हैं इसके साथ ही पीछे बैठने वाले लोगों के लिये पर्याप्त जगह चौकाने वाली है। शिकायत? खिड़कियों की ऊँचाई अधिक होने से झुंझलाहट होती है, कई भागों की गुणवत्ता भी संदिग्ध है, आगे वाले आर्मरेस्ट के कारण कुहनियों में दर्द होने लगता है, भारी दरवाजे ट्रक की तरह बन्द होते हैं और सीट बेल्ट तथा सीट ऐडजस्टर्स के खराब जगह पर स्थित होने से अच्छी ड्राइविंग स्थिति को पाने में जूझना पड़ता है। भारी दरवाजों तथा सीटबेल्ट की उपलब्धता जैसे मसलों को निकट भविष्य में सुलझाया जा सकता है क्योंकि शायद महिन्द्रा e2o के चार दरवाजे वाले संस्करण को लाने की सोच रहा है।

आराम और सुविधा
महिन्द्रा की e2o प्रीमियम 6.2 इन्च की टचस्क्रीन (बेहतर होगा यदि इसे हम प्रेस स्क्रीन कहें क्योंकि इसे चलाने के लिये उंगलियों से काफी दबाव देना पड़ता है), फैक्टरी से फिट नैविगेशन, डीवीडी प्लेयर, ब्लूटूथ तथा आईपॉड कनेक्टिविटी से अच्छी तरह से सुसज्जित है। इस इलेक्ट्रिक कार में पूर्णतयः डिजिटल इन्ट्रूमेन्ट पैनल होने के साथ आकर्षक और आसानी से पढ़ा जाने वाला ब्लू बैकलाइटिंग है, कीलेस एन्ट्री और बैक कैमरा भी इसमें उपलब्ध है।

एयरकंडिशनर चलाना तथा दूर से कार को बन्द करने जैसे कार के कुछ भागों को आप अपने स्मार्टफोन द्वारा डाउनलोड किये गये ऐप्स से संचालित कर सकते हैं। रिवाइव फंक्शन, जो आकस्मिक 8 किमी की दूरी बढ़ा देता है, को भी ऐप द्वारा संचालित किया जा सकता है। हालँकि यह काफी धीमा काम करता है और संशय वाला होता है, इसलिये हमारे लिये केन्द्रीय पैनल पर स्थित टचस्क्रीन बेहतर विकल्प था।

गणित
समय आ गया है कि अब हम जरूरी अंको पर ध्यान दें। इसी दाम की अन्य पेट्रोल तथा डीजल कारों की अपेक्षा महिन्द्रा की e2o कहाँ ठहरती है। हमने मारुति सुजुकी की पेट्रोल तथा डीजल स्विफ्ट से e2o की तुलना करते हुये यह जानने की कोशिश की कि पारम्परिक ईंधन वाले वाहनों की अपेक्षा इसे खरीदने तथा चलाने की लागत क्या है। आगे कई आश्चर्यजनक खुलासे होगें, इसलिये पढ़ना जारी रखें।

रेन्ज
महिन्द्रा e2o प्रीमियम द्वारा 20 प्रतिशत रेन्ज वृद्दि का दावा करते हैं, जो कि एक चार्ज पर 10 यूनिट बिजली की खपत से पहले 100 किमी की थी। हलाँकि हम नये दावे वाले 120 किमी तक नहीं पहुँचे फिर भी हमने सम्मानजनक 92 किमी की दूरी तय की, इस बात को ध्यान में रखते हुये कि हमने बूस्ट का पयोग धड़ल्ले से किया, आधे टेस्ट के दौरान एसी चलता रहा और टॉप स्पीड टेस्ट भी किया। ऐसा कहना उचित होगा कि मध्यम ड्राइविंग शैली और एयरकंडिशनर का संयमित उपयोग के साथ एक बार के चार्ज से लगभग 100 किमी जाया जा सकता है।

वार्षिक रूप से चलाने की लागत (सर्विस और मेन्टेनेन्स को छोड़कर)
हमने तीन कारों को 45 किमी प्रतिदिन के हिसाब से चलाया, जबकि 10 यूनिट बिजली की कीमत 4.85 रूपए प्रति यूनिट, पेट्रोल 80 रूपए प्रति लीटर और डीजल को 65 रूपए प्रति लीटर माना।
सर्विस और मेन्टेनेन्स को छोड़कर वार्षिक रूप से चलाने की लागत निम्नानुसार पाई गई:
- मारुति सुजुकी स्विफ्ट पेट्रोल - 1,00,800 रूपए
- मारुति सुजुकी स्विफ्ट डीजल - 70,200 रूपए
- महिन्द्रा e2o - 9000 रूपए

5 वर्ष तक चलाने की लागत (सर्विस और मेन्टेनेन्स को लेकर)
चूँकि e2o की बैट्री को 5 साल या 80,000 किमी तक चलने का दावा किया गया है इसलिये हम लागत की गणना को पाँच साल में कर रहे हैं। महिन्द्रा का कहना है कि e2o के लिये वार्षिक रूप से वांछित 3 सर्विस मुफ्त रहेगीं जबकि बची हुई दो सर्विस 2000 रूपए प्रति वर्ष की दर से 4000 रूपए की पड़ेंगी। मारुति सुजुकी के अनुसार पेट्रोल और डीजल स्विफ्ट की वार्षिक सर्विस लागत क्रमशः लगभग 10,000 रूपए और 12,000 रूपए है।
सर्विस और मेन्टेनेन्स को सम्मित करते हुये 5 वर्ष तक चलाने की लागत निम्नानुसार है:
- मारुति सुजुकी स्विफ्ट पेट्रोल - 5,54,000 रूपए
- मारुति सुजुकी स्विफ्ट डीजल - 4,11,000 रूपए
- महिन्द्रा e2o - 49000 रूपए

नोट: पाँच सालों के बाद e2o की बैट्रियों को 1,80,000 रूपए की लागत से बदलना पड़ेगा जो सही मेन्टेनेन्स के साथ अगले 80,000 से 1,00,000 किमी तक कार चलने देती है। हमने इस लागत को अपनी गणना में शामिल नहीं किया है क्योंकि फिर हमें स्विफ्ट के लिये भी अगले पाँच सालों के ईंधन का खर्च जोड़ना पड़ेगा। हलाँकि इस बात का ध्यान रखें कि पाँच सालों के बाद यदि आप बैट्री नहीं बदलवाते हैं तो अपनी e2o को बेच नहीं पायेंगे। हलाँकि यह स्थिति पेट्रोल या डीजल स्विफ्ट में नहीं आयोगी और जो हल्की फुल्की कमियाँ इन पाँच सालों में आ जायेगीं उनके लिये इतना भारी भरकम खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।

प्रति किमी चलाने की लागत (सब कुछ सम्मिलित करते हुये)
हमने हर साल की चलने वाली दूरी को 16,200 किमी माना जो कि 45 (प्रतिदिन का किमी उपयोग), 30 (दिन) और 12 (महीने) का गुणनफल है। कुल दूरी 81,000 किमी बनी जोकि वार्षिक दूरी (16,200 किमी) और वर्षों (5) का गुणनफल है। कारों की मेन्टेनेन्स लागत को ध्यान में रखते हुये जो कि 4000 रूपए e2o के लिये, 10,000 रूपए पेट्रोल स्विफ्ट के लिये और 12,000 रूपए डीजल स्विफ्ट के लिये पहले ही बताया जा चुका है।
तीनों कारों की प्रति किमी चलाने की लागत को निम्नानुसार पाया गया:
- मारुति सुजुकी स्विफ्ट पेट्रोल - 6.84 रूपए प्रति किमी
- मारुति सुजुकी स्विफ्ट डीजल - 5.06 रूपए प्रति किमी
- महिन्द्रा e2o - 0.60 रूपए प्रति किमी

इलेक्ट्रिक e2o इन सभी में लागत कि दृष्टि से सबसे ऊपर आती है। यह सच है कि देश में चार्जिंग के लिये आधारभूत ढाँचे में कमी है लेकिन महिन्द्रा इस बात के लिये प्रयासरत है कि कम से कम बैंगलोर और दिल्ली जैसे दो प्रमुख बाजारों में इन चार्जिंग स्थलों की उपलब्धता बढ़ सके।

कम्पनी का कहना है कि बैंगलोर में लगभग 100 और दिल्ली में 150 महिन्द्रा रेवा चार्जिंग स्टेशन हैं। जिन दो चार्जिंग स्टेशनों को हमने भूतपूर्व गार्डेन सिटी में देखा, उनमे फोरम मॉल के चार कार वाले बड़ें स्टेशन में ही आरसीडी केबल काम कर रहीं थी और मुफ्त उपलब्ध थीं। दूसरे स्थानीय गैराज में केबल नहीं थी और हमें बताया गया कि कार के साथ का चार्जिंग बॉक्स ठीक से काम नहीं कर रहा था - ऐसी स्थित में हम बुरे फँस जाते अगर मॉल वाला स्टेशन पास में न होता।

तो स्थिति यह है कि महिन्द्रा e2o भविष्य के यातायात का साधन हो सकती है अगर कीमतें कुछ कम हो जायें। 8 लाख की कीमत के साथ ज्यादातर लोगों के लिये यह पहुँच से बाहर है इसलिये इस समय यह केवल धनी लोगों के लिये दूसरी या तीसरी कार के रूप में देखी जा सकती है। बाजार में उपरी स्तर पर स्थित होने के कारण e2o के अर्गोनॉमिक्स, फिट और फिनिश तथा ड्राइविंग लक्षणों में बेहतरी की गुंजाइश बरकरार है। हम इस बात से आश्वस्त नहीं हैं कि कार का पूर्ण डिजाइन कैसा है।

महिन्द्रा e2o को बेचने का हर सम्भव प्रयास कर रहा है जिसमें कि बैट्रियों को लोन पर लिया जा सकना शामिल है। ऐसी स्थिति में आप कार के लिये 6,15,000 (बैंग्लोर में) और 3000 रूपए प्रति महीना एनर्जी शुल्क के रूप में दे सकते हैं। लेकिन हम महिन्द्रा से पूछते हैं कि ये लागत इतनी ज्यादा क्यों है। यह काफी खराब बात है कि आप इन कारों की कीमते आम आदमी की पहुँच से बाहर रख रहे हैं क्योकि यह सच है कि e2o लागत की दृष्टि से देश की सबसे सस्ती कार नहीं भी हो तो भी सबसे सस्ती कारों में से एक तो है ही। और हम इस सत्य से बच नहीं सकते......
यह कहानी यहीं समाप्त होती है। किसी प्रकार के प्रश्न, टिप्पणी या सुझाव के लिये अवश्य लिखें।


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