फीकी रही बैंगलूरू ऑटो शो की रौनक

चार दिवसीय यह ऑटो शो बैगलूरू के पैलेस ग्राउंड में चल रहा था। इस ऑटो शो को देखने के लिए दर्शकों के लिए 100 रुपए का टिकट रखा गया था। शो को देखने के बाद कोई भी दर्शक उतना संतुष्ट नहीं नजर आया जितना की होना चाहिए था। इस ऑटो शो के कमियों का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि शो के दौरान भारत की प्रमुख दोपहिया निर्माता कंपनियां हीरो, बजाज, और टीवीएस के एक वाहन को भी शामिल नहीं किये गये थे। आपकों बता दें कि हाल ही में हीरो 26 वर्षो के बाद होंडा से अलग हुआ है।
इसके अलावा चार पहिया के स्टालों ने भी दर्शकों के हाथों निराशा ही सौंपी। वैसे तो ऑटो शो में टोयोटा, निसान, मारूति सुजुकी, फोर्ड, शेवरले सहित बहुत सी कंपनियों के वाहन मौजूद थे, लेकिन ये वहीं वाहन थे जो आसानी से बैंगलूरू की सड़कों पर फर्राटे भरते देखे जा सकते है। दर्शकों को फेरारी, रोल्स रॉयस, डुकाटी, आदि के वाहनो को न देख पाने का मलाल रहा। किसी भी ऑटो शो में दर्शक ऐसे वाहनो को देखने के लिए जाते है, जो या तो बाजारों में आने वाली हो या फिर जो दुर्लभ हो।
विंटेज वाहनो ने रखी ऑटो शो की लाज
बैंगलूरू ऑटो शो की लाज विंटेज वाहनो ने रखी। जहां एक तरफ दर्शक सड़कों पर दौड़ने वाली कारों को देख कर बोर हो रहे थे, वहीं शो में प्रदर्शित विंटेज कारों और मोटरसाइकिलों ने दर्शकों को अपनी तरफ खींचने में खासी भूमिका निभाई। इस शो के दौरान 1952 की इंग्लैंड की बनी जगुआर मार्क7, और 1938 की जर्मनी की बनी एडलर ईगल ने काफी तारीफें बटोरीं।
इसके अलांवा विंटेज वाहनो की श्रेणी में शामिल बीएसए, ट्रम्प, और एरीयल जैसी पुरानी मोटरसाइकिलो ने भी लोगों को काफी आकर्षित किया। वहीं शो में बैंगलूरू के इंजीनियरिंग के छात्रो ने भी अपने द्वारा बनाए गये वाहनों को प्रदर्शित किया था। जो कि दर्शकों को काफी पसंद आया। कुल मिलाकर यह ऑटो शो अपने लीक से हट गया और जिसके लिए ऑटो शो जाना जाता है वैसा कुछ भी नहीं था।


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