फ्यूल की बढ़ती कीमतें: खराब ड्राइविंग स्टाइल से कैसे गड़बड़ाता है बजट, जानिए

देश भर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण आम लोगों के जेब पर बोझ अचानक से बढ़ गया है। एक तरह सरकार का कहना है कि ओवरसीज मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे के कारण ईंधन की कीमतों पर कोई भी नियंत्रण उनके बस के बाहर है। दूसरी ओर आम जन इस बात से हलकान है कि आखिरकार पेट्रोल और डीजल की कीमत से राहत कैसे पाई जाये।

इस समय देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमत अपने सबसे उच्च्तम स्तर पर पहुंच चुकी है। बीते दिनों मुंबई शहर में पेट्रोल की कीमत तकरीबन 87.83 रुपये तक पहुंच गई थी। पिछले कई सालों से पेट्रोल और डीजल की कीमत को लेकर मारा मारी हो रही है लेकिन बावजूद सरकार की नीतियों और फेरबदल के भी नतीजा सिफर ही रहा है।

खैर, ये तो अर्थव्यवस्था, विश्व तेल बाजार और क्रूड आॅयल की कीमत पर निर्भर है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ ऐसा है जो कि आपके बजट को गड़बड़ करता है। जी हां, आपकी ड्राइविंग स्टाइल और वाहन चलाने का तरीका भी काफी हद तक आपके जेब पर पड़ने वाले इस भार का प्रमुख जिम्मेदार है। आज हम आपको अपने इस लेख में इसी बारे में बतायेंगे कि आपकी ड्राइविंग स्टाइल किस तरह से आपके बजट को प्रभावित करती है।

एग्रेसिव ड्राइविंग स्टाइल:

सबसे पहले तो एग्रेसिव ड्राइविंग स्टाइल का प्रभाव कार के ईंधन खपत प्रणाली पर सबसे तेज पड़ता है। आप जितना एग्रेसिव होकर वाहन चलाते हैं आपका वाहन उतना ही ज्यादा ईंधन की खपत करता है। यानी की समय के साथ आपके वाहन की माइलेज लगातार घटती जाती है। आपको बता दें कि, वाहन के स्पीडोमीटर पर एक ग्रीन पट्टी होती है जिसे इकोनॉमी रेट कहते हैं आप वाहन की स्पीड जितनी ज्यादा उस ग्रीन पट्टी पर रखेंगे आपको उतना ही बेहतर माइलेज मिलेगा। लेकिन ज्यादातर लोग जोश में इस बात का ख्याल नहीं रखते हैं और वो एग्रेसिव होकर वाहन चलाते हैं। ध्यान रहे वाहन को स्पीड ईंधन से ही मिलती है जितनी ज्यादा स्पीड उतना ज्यादा ईंधन का खपत।

एक शोध द्वारा पाया गया है कि एग्रेसिव ड्राइविंग के कारण ईंधन की खपत तकरीबन 33 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसके अलावा बिना सलीके से एक्सलेटर का प्रयोग यानि की बार बार एक्सलेर को कम और तेज करना इसके अलावा अचानक से वाहन को रोक कर फिर से तेज स्पीड में आगे बढ़ाना इन सभी बातों का सीधा असर वाहन के माइलेज पर पड़ता है।

हैवी ट्रैफिक में ड्राइविंग:

ट्रैफिक इस समय पूरी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली समस्या है। दुनिया भर में सड़कों पर वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। वाहनों की बिक्री पर पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमत का कोई अस​र नहीं पड़ रहा है। हैवी ट्रैफिक में ड्राइव करना भी आपके बजट को गड़बड़ करता है। बहुतायत लोग बिना किसी योजना के ट्रैफिक को ध्यान में न रखते हुए ऐसे रास्तों पर ड्राइव करते हैं जहां पर उन्हें लंबे ट्रैफिक जाम से दो चार होना पड़ता है। इसके अलावा ट्रैफिक में फंसे होने के दौरान वो वाहन को भी बंद नहीं करते हैं क्योंकि उस वक्त भारी गर्मी के चलते एसी को चालू रखने के लिए वाहन का इंजन स्टॉर्ट रखना पड़ता है। जिससे बेवजह ईंधन की खपत होती है।

तो यदि आप भी इस तरह की ड्राइविंग करते हैं तो ऐसा करने से बचें। ड्राइव पर निकलने से पहले ट्रैफिक का हाल पता कर लें ये पता करना आज के समय में बेहद ही आसान है इंटरनेट के इस युग में जीपीएस मॉनिटर के माध्यम से आप ट्रैफिक के ताजा हाल की रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा आज कल एफ रेडियो आदि पर भी ताजा ट्रैफिक हाल की खबरें प्रसारित की जाती है। इसलिए घर से निकलने से पहले ट्रैफिक हालातों का पता लगा कर ही घर से निकलें।

एक्जेलरेशन और गियर शिफ्टिंग:

एक्जेलरेशन और गियर शिफ्टिंग भी वाहन के ईंधन खपत का प्रमुख कारण होते हैं। बहुतायत लोग वाहन को स्टॉर्ट करते वक्त तत्काल ही पहले गियर में ही फुल एक्जेलरेशन का प्रयोग करते हैं। ऐसा वो इसलिए करते हैं ताकि तत्काल उन्हें हाई स्पीड मिल सके। आपको बता दें कि, यदि आप तत्काल हाई एक्जेलरेशन का प्रयोग करते हैं तो उस वक्त इंजन को ज्यादा से ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ती है। एक्सपर्ट की मानें तो एक बेहतर ड्राइविंग के लिए कम से कम 30 सेकेंड तक वाहन की स्पीड को उसकी रफ्तार से ही आगे बढ़ते देना चाहिए, इसके बाद जब आपका वाहन एक बेहतर गति पर आ जाये तो गियर एक्जेलरेशन और गियर शिफ्टिंग का प्रयोग करें।

इसके अलावा कुछ लोग तीसरे या चौथे गियर में ही वाहन को आगे बढ़ाने लगते हैं। ये भी एक बड़ी वजह होती है। क्योंकि रूका हुआ वाहन अचानक से तीसरे या फिर चौथे गियर में उस गति से आगे नहीं बढ़ पाता है जितने की जरूरत होती है। ऐसे में वाहन चालक को ज्यादा एक्जेलरेशन का प्रयोग करना पड़ता है जो कि ज्यादा ईंधन खपत का प्रमुख कारण बनता है।

एयर कंडीशनर का प्रयोग:

आज के समय में एयर कंडीशनर का प्रयोग एक बहुत बड़ी जरूर बन गया है। चाहे घर हो या वाहन हर जगह इंसान को एयर कंडीशनर की जरूरत पड़ती है। एयर कंडीशनर का अनियमित प्रयोग भी आपके बजट को बुरी तरह प्रभावित करता है। चूकिं एयर कंडीशनर एक बेल्ट से चलता है जो कि सीधा इंजन से जुड़ा होता है।

एयर कंडीशनर जितना ज्यादा और तेज चलेगा आपके वाहन का इंजन उतना ही ज्यादा ईंधन का खपत करेगा। एयर कंडीशनर के प्रयोग से वाहन का माइलेज लगातार घटता ही जाता है। इसलिए वाहन को स्टॉर्ट करने के बाद तब तक एयर कंडीशनर को स्टॉर्ट न करें जब तक आपकी कार एक बेहतर स्पीड पर न पहुंचा जाये। इसके अलावा थोड़ी दूरी तक एयर कंडीशनर का प्रयोग करें और यदि आपको ज्यादा जरूरत न हो तो बीच बीच में एयर कंडीशनर को कम या फिर बंद करते रहें इससे आपका वाहन बेहतर माइलेज देगा जिससे आपके जेब पर कम बोझ पड़ेगा।

खिड़कियों को खोल कर ड्राइव करना:

कुछ लोगों को आदत होती है कि वो कार की खिड़कियों को खोलकर ड्राइव करते हैं। ऐसा कुछ लोग इसलिए भी करते हैं ताकि उन्हें एयर कंडीशनर न चलाना पड़े। यकिन मानिए ये एक बेहद ही गलत सोच है। यदि आप अपनी कार के विंडो को खोलकर ड्राइविंग करते हैं तो इससे आपकी कार के माइलेज पर ज्यादा ​बुरा असर पड़ता है। बजाय इसके कि आप एयर कंडीशनर का प्रयोग करें। क्योंकि जब कार की खिड़कियां खुली रहती है तो कार में हवा तेजी से प्रवेश करता है जो कि कार की रफ्तार को कम करता है जिसके कारण वाहन चालक को ज्यादा से ज्यादा एक्जेलरेशन का प्रयोग करना पड़ता है और ज्यादा एक्जेलरेशन का सीध मतलब होता है ज्यादा ईंधन की खपत। इसलिए ऐसा करने से बचें और कार के विंडो को बंद करके ही ड्राइविंग करें।

पहियों में हवा का स्तर:

वाहन के खराब माइलेज का एक प्रमुख कारण उसके पहियों में हवा का स्तर भी होता है। यदि आपके कार के पहियों में हवा कम होगी तो उसे वो स्पीड नहीं मिल पायेगी जितना कि उसे एक्जेलरेशन दिया जा रहा होगा। इसलिए ड्राइव पर निकलने से पहले पहियों में हवा की चेकिंग जरू करा लें ये आपके कार के माइलेज पर सीधा असर डालती है। इससे न केवल आपकी कार का माइलेज प्रभावित होता है बल्कि आपके कार के पहियों की लाईफ पर भी बुरा असर पड़ता है।

इसके अलावा हमेशा अच्छी क्वालिटी के बेहतर पहियों का ही प्रयोग करें। कभी सस्ते के चक्कर में किसी ऐसे पहियों का चुनाव न करें जिनकी लाइफ कम हो। कार के पहियों का बेहतर होना कार के लाइफ को भी काफी ​हद तक प्रभावित करता है। उम्मीद है कि ये सभी टिप्स आपको बेहतर लगे होंगे, आप इन पर विचार कर के अपने वाहन के माइलेज के साथ ही जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी काफी हद तक सुधार सकते हैं।

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