इस दीवाली #WeGo के संग रौशन की कुछ जिंदगियां

Written by: Shashikant

हमने अपने पिछले लेख को धंतेरस पर छोड़ा था। उस वक्‍त हम पार्वती हिल पर थे, जहां मेरी टीम, मैं और वीगो सब साथ थे। हम पहाड़ी के ऊपर से पुणे के रौशन नजारे को देख रहे थे। और साथ ही साथ मां लक्षमी को नमन कर रहे थे। इस प्रार्थना के साथ कि वो लोगों के घरों में सदैव उजाला बिखेरती रहें।

इसी पल हमें महसूस हुआ कि कुछ लोग हैं, जिनके जीवन में अंधेरा है, और हमें उनके संग अपनी खुशियां बांटनी चाहिये। एक गहरे चिंतन और पुणे में रहने वाले कुछ दोस्‍तों से सलह-मश्विरा के बाद हमने तय किया कि हम माहेर आश्रम को #WegoMoment (खुशियों के पल वीगो के संग) देंगे। माहेर आश्रम निराश्रित महिलाओं, बच्‍चों और पुरुषों का घर है।

माहेर आश्रम के बारे में: सिस्‍टर लूसी कुरियन ने 1997 में माहेर की परिकल्‍पना की और इसकी स्‍थापना की। माहेर ने कठिन पश्रिम के साथ अपनी एक पहचान हासिल की और हिंसा से पीड़‍ित पूरी तरह निराश हो चुकीं भारत की महिलाओं और बच्‍चों की समस्‍याओं को जड़ से समझा। और उन्‍हें अपनाया। माहेर का लक्ष्‍य है ऐसे मुद्दों के प्रति गांवों व झुग्गियों में रहने वाले लोगों को जागरूक करना, ताकि महिलाएं और बच्‍चे स्‍वस्‍थ्‍य रह सकें और आत्‍मनिर्भर बन सकें।

आश्रम जाते वक्‍त रास्‍ते में हम दो जगह रुके। ये दोनों ही पुणे के प्रसिद्ध स्‍थल हैं। हमारा पहला ठहराव था 1950 में स्‍थापित हुआ 'चिताले बंधु मिठाईवाले'। यहां हमने महाराष्‍ट्र की पारम्‍परिक मिठाई भाकरवाड़ी का लुत्‍फ उठाया।

हमारा दूसरा ठहराव था एक बूढ़ा फल वाला, जो यह दावा करता है कि पूरे पुणे में सबसे ज्यादा ताजे फल उसी के होते हैं। हमने उसकी बात मान ली और उतने फल खरीद लिये, जितने वीगो में रखे जा सकते थे। उस वक्‍त हमारे दिमाग में यह घूमता रहा कि यह पुणे में सबसे प्रसिद्ध है।

स्‍कूटर में फल और बच्‍चों के लिये कुछ खिलौने रखने के बाद, हम आश्रम के लिये निकल पड़े। जिस वक्‍त हम अपने रास्‍ते पर थे, तब हम वीगो के बैलेंस को देख कर बार-बार चकित हो रहे थे। हमारा #WegoExperience (वीगो के संग अनुभव) एक दम अलग था। यह तो स्‍पष्‍ट था कि अगर हम वीगो पर अतिरिक्‍त लगेज रखने की सोचते तो वो भी संभव हो जाता।

माहेर के बच्‍चे उत्साहित थे, और हमारी इस यात्रा के बारे में जानने के लिये उत्सुक थे। हमारे ऊपर सवालों की बौछारें पड़ने लगीं- आप कौन हैं, हम यहां किस लिये आये, आदि। कहा जाता है कि जब तक आपके पास कोई बच्‍चा नहीं है, तब तक चुप्‍पी ही सुनहरा पल है, नहीं तो आपका मौन बैठना संदेह के घेरे में आ सकता है...

हमने उनके 20 प्रश्‍नों के उत्तर देने के प्रयास किये, जो कि बेहद मजाकिया थे। उसमें वीगो से जुड़े सवाल भी थे। जैसे, एक ने पूछा, "आप किस रंग की गाड़ी में आये हैं?"। जिस पर दूसरे ने उत्तर दिया, "तुम्‍हें दिखता नहीं क्‍या? वहां एक लाल है, एक नीला और एक सफेद"। देखते ही देखते टीमें बन गईं और पहेलियों का खेल शुरू हो गया, यह जानने के लिये कि कौन सी टीम बेहतर है- लाल (लड़कियों) और नीली (लड़कों) की। उन्‍होंने स्‍मार्ट ढंग से पहेलियों के इस खेल को खेला और रीडिंग रूम में जाकर खूब मस्‍ती की।

इससे पहले हमें इतनी खुशी कभी नहीं मिली थी। हमने वीगो पर रात की सवारी को प्लान किया था। यह उतनी लंबी यात्रा नहीं थी, जो हम उसके बारे में बताते जायें और वक्‍त गुजर जाये। इसी बीच एक सवाल आया वीगो कैसे चलती है?

ऐसा पहले नहीं हुआ था, कि हमसे कोई वीगो पर सवारी करने के लिये पूछे और हम पर यह बताने के लिये दबाव बनाये, कि वीगो कितनी तेज चल सकती है। हम इस सोच में पड़ गये थे कि तेज गति से चलने वाले कौन हैं, हम या बच्‍चे?

चलिये हंसी-मजाक को किनारे करते हैं, किसी भी चीज के बारे में बताने से भी ज्‍यादा जरूरी है वीगो के सेफ्टी फीचर और यह बताना कि स्‍कूटर या मोटरबाइक चलाते वक्‍त हेलमेट पहनना कितना महत्‍वपूर्ण है।

बच्‍चों के साथ एक लंबे और अच्‍छी तरह बिताये गये दिन के बाद हमने रात को वापस आने का फैसला किया।

"प्रयासों के बारे में तभी महसूस होता है, जब कोई व्‍यक्ति किसी काम को करने से इंकार कर दे," यह हमने कहीं पढ़ा था। और यही वो चीज थी जो पुणे के दिल में छिपी हुई थी। और अब हमारे दिल में बच चुकी थी माहेर के बारे में।

माहेर ने हमें सोचने के लिये बहुत कुछ दिया। हमसे नींद छिन चुकी थी और इस छोटी सी यात्रा के बारे में बाते थीं, जो खत्‍म नहीं हो रही थीं। हम पूरी रात बाते करते तो भी खत्‍म नहीं होतीं। हमारी आंखों में नींद भरी हुई थी, लेकिन हमने न आगे सोचा न पीछे, वीगो पर सवार हुए और वापस सारसबाग आ गये, जहां दीपोत्सव चल रहा था।

सैंकड़ों जलते हुए दीये पानी में तैर रहे थे। इन दीयों ने झील युक्‍त पार्क को एक अलौकिक प्रकाश में बदल दिया था।

साथ में चारों तरफ अपनी चमक बिखेर रहे कंडील त्‍योहार के उत्‍साह को कई गुना बढ़ा रहे थे। और टीवीएस वीगो ने यह सिद्ध कर दिया था कि दीवाली के दौरान महाराष्‍ट्र की सांस्‍कृतिक राजधानी में घूमने के लिये इससे बेहतर कोई स्‍कूटर नहीं।

तो यहां पर वीगो दीवाली एडवेंचर का दूसरा भाग समाप्‍त होता है। अपनी लिस्‍ट में #WegoKolkata और #WegoPune पर हम टिक कर चुके हैं। अगला त्‍योहार है क्रिसमस और इस मौके पर हमारा अगला पड़ाव होगा कोचिन। जिसे ईश्‍वर की धरती कहा जाता है। यानी हम फिर मिलेंगे आपसे #WegoCochin के साथ।

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Story first published: Thursday, November 17, 2016, 10:37 [IST]
English summary
Exploring the charms & delights of Pune during Diwali on a TVS Wego. How did #WeGo about it? Read on to find out - Part 2.
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